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बारिश के चलते काली नदी फिर से उफान पर
Updated Wed, 22 Aug 2018 10:56 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में रुक-रुक कर बारिश का क्रम जारी है। लगातार हो रही बारिश से काली नदी का जल स्तर फिर से बढ़ने लगा है। इससे नदी किनारे बसे लोग सहमे हुए है। अगले 48 घंटे में भारी बारिश, बादल फटने और बज्रपात होने की संभावित घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। लोगों को नदी तटों पर नहीं जाने की सलाह दी गई है।
जिले के अधिकांश क्षेत्रों में हल्की बारिश जारी है। इससे नदियों का जल स्तर एक बार फिर से बढ़ने लगा है। काली नदी का जल स्तर पिछले दिनों कम हो गया था। बुधवार को यह बढ़कर फिर से 888.90 मीटर पर पहुंच गया। नदी का खतरे का जल स्तर 890 मीटर है। इसे देखते हुए नदी के जल स्तर पर लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। गोरी और सरयू का जल स्तर अभी खतरे के निशान से काफी दूर है। अलबत्ता नाचनी क्षेत्र में रामगंगा उफान पर है और लगातार भूकटाव हो रही है।
मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसे देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। आशंका व्यक्त की गई है कि भूस्खलन, बादल फटने, बज्रपात और नदियों का जल स्तर बढ़ने की घटनाएं हो सकती हैं। साथ ही सड़क, संचार और विद्युत सेवा बाधित हो सकती है। इसे देखते हुए सभी राजस्व उपनिरीक्षकों, ग्राम विकास और पंचायत अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में बने रहने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन आईआरएस प्रणाली के नामित अधिकारी और विभागीय नोडल अधिकारी हाई अलर्ट पर रहेंगे। लोगों को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में नहीं जाने की भी सलाह दी गई है।
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जिले के अधिकांश क्षेत्रों में हल्की बारिश जारी है। इससे नदियों का जल स्तर एक बार फिर से बढ़ने लगा है। काली नदी का जल स्तर पिछले दिनों कम हो गया था। बुधवार को यह बढ़कर फिर से 888.90 मीटर पर पहुंच गया। नदी का खतरे का जल स्तर 890 मीटर है। इसे देखते हुए नदी के जल स्तर पर लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। गोरी और सरयू का जल स्तर अभी खतरे के निशान से काफी दूर है। अलबत्ता नाचनी क्षेत्र में रामगंगा उफान पर है और लगातार भूकटाव हो रही है।
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मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसे देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। आशंका व्यक्त की गई है कि भूस्खलन, बादल फटने, बज्रपात और नदियों का जल स्तर बढ़ने की घटनाएं हो सकती हैं। साथ ही सड़क, संचार और विद्युत सेवा बाधित हो सकती है। इसे देखते हुए सभी राजस्व उपनिरीक्षकों, ग्राम विकास और पंचायत अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में बने रहने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन आईआरएस प्रणाली के नामित अधिकारी और विभागीय नोडल अधिकारी हाई अलर्ट पर रहेंगे। लोगों को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में नहीं जाने की भी सलाह दी गई है।
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