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भालुओं ने 35 मकानों की छत तोड़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, मुनस्यारी (पिथौरागढ़)
Updated Fri, 11 Nov 2016 10:16 PM IST
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मल्ला जोहार के आठ माइग्रेशन गांवों से लोगों के घाटियों की ओर आते ही भालुओं का आतंक शुरू हो गया।
यहां मिली सूचनाओं में कहा गया है कि भालुओं ने 35 मकानों की छत तोड़ दी है और अंदर घुसकर राशन तथा अन्य सामान नष्ट कर दिया है। इन गांवों के लोग ठंड शुरू होते ही अक्तूबर के अंत में घाटियों को निकल आते हैं, लेकिन जरूरी सामान को घरों में रख देते हैं।
हर साल इन गांवों में भालुओं का आतंक हो जाता है। भालू भी उच्च हिमालयी क्षेत्र में हिमपात शुरू होते ही निचले इलाकों में आने लगते हैं।
मल्ला जोहार के बुर्फू गांव से गणेश सिंह बृजवाल ने बताया कि बुर्फू, रिलकोट, गनघर, पाछू, मापा, बिलजू, खिलांच, रालम गांवों में करीब तीन दर्जन घरों की छत भालुओं ने तोड़ दी है। भालू भोजन की तलाश में हर साल ऐसे ही इन खाली पड़े मकानों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि इलाके में भालुओं के झुंड अक्सर नजर आते हैं।
इन दिनों इलाके में आबादी न होने से लोगों पर हमले का खतरा नहीं रहता। श्री बृजवाल ने तहसील प्रशासन और वन विभाग को सूचना देकर कहा है कि यदि भालुओं का आतंक समाप्त नहीं किया गया तो यह और तबाही मचा सकते हैं। यही नहीं माइग्रेशन से लौटने पर लोगों को इन मकानों में कोई भी चीज सुरक्षित नहीं मिलेगी। तहसीलदार खुशाल राम ने कहा है कि वन विभाग के अधिकारियों से इस समस्या का समाधान निकालने को कहा गया है।
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यहां मिली सूचनाओं में कहा गया है कि भालुओं ने 35 मकानों की छत तोड़ दी है और अंदर घुसकर राशन तथा अन्य सामान नष्ट कर दिया है। इन गांवों के लोग ठंड शुरू होते ही अक्तूबर के अंत में घाटियों को निकल आते हैं, लेकिन जरूरी सामान को घरों में रख देते हैं।
हर साल इन गांवों में भालुओं का आतंक हो जाता है। भालू भी उच्च हिमालयी क्षेत्र में हिमपात शुरू होते ही निचले इलाकों में आने लगते हैं।
मल्ला जोहार के बुर्फू गांव से गणेश सिंह बृजवाल ने बताया कि बुर्फू, रिलकोट, गनघर, पाछू, मापा, बिलजू, खिलांच, रालम गांवों में करीब तीन दर्जन घरों की छत भालुओं ने तोड़ दी है। भालू भोजन की तलाश में हर साल ऐसे ही इन खाली पड़े मकानों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि इलाके में भालुओं के झुंड अक्सर नजर आते हैं।
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इन दिनों इलाके में आबादी न होने से लोगों पर हमले का खतरा नहीं रहता। श्री बृजवाल ने तहसील प्रशासन और वन विभाग को सूचना देकर कहा है कि यदि भालुओं का आतंक समाप्त नहीं किया गया तो यह और तबाही मचा सकते हैं। यही नहीं माइग्रेशन से लौटने पर लोगों को इन मकानों में कोई भी चीज सुरक्षित नहीं मिलेगी। तहसीलदार खुशाल राम ने कहा है कि वन विभाग के अधिकारियों से इस समस्या का समाधान निकालने को कहा गया है।
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