{"_id":"5a218d674f1c1b6a678bf3f3","slug":"31512148327-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जनसुनवाई से पहले सीमांकन किया जाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जनसुनवाई से पहले सीमांकन किया जाए
Updated Fri, 01 Dec 2017 10:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। महाकाली की आवाज संगठन ने नए सिरे से होने वाली जनसुनवाई से पहले पंचेश्वर बांध परियोजना के डूब क्षेत्र और प्रभावित क्षेत्र का सीमांकन करने की मांग उठाई है। जिलाधिकारी सी रविशंकर के माध्यम से केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री को भेजे पत्र में संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने कहा है कि वॉपकोस कंपनी ने बांध की जो डीपीआर तैयार की है उसमें 22 गांवों के 1308 परिवारों को पूर्ण और 112 गांवों के 29715 परिवारों को आंशिक रूप से प्रभावित दिखाया है।
उन्होंने कहा है कि आंशिक प्रभावित का अभिप्राय ऐसे परिवार जिनकी सिर्फ जमीन डूब क्षेत्र में आ रही है, लेकिन अब तक डूब क्षेत्र का सीमांकन न होने से यह कहना गलत है कि बांध में कितनी कृषि योग्य भूमि, कितनी वन भूमि डूबेगी, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि अगस्त में हुई जनसुनवाई के समय इन मुद्दों को लोग सामने नहीं रख पाए। क्योंकि डीपीआर का पूरा अध्ययन नहीं किया गया था।
अब प्रभावित क्षेत्र का सीमांकन करने और जनसुनवाई की तिथि फिर से तय करने की मांग उठाते हुए कहा कि बांध को लेकर पैदा हुई संशय की स्थिति को समाप्त करना जरूरी है। साथ ही नए सिरे से होने वाली जनसुनवाई से पहले स्पष्ट सीमांकन किया जाए और लोगों को डूबने वाली जमीन का पूरा ब्योरा दिया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा है कि आंशिक प्रभावित का अभिप्राय ऐसे परिवार जिनकी सिर्फ जमीन डूब क्षेत्र में आ रही है, लेकिन अब तक डूब क्षेत्र का सीमांकन न होने से यह कहना गलत है कि बांध में कितनी कृषि योग्य भूमि, कितनी वन भूमि डूबेगी, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि अगस्त में हुई जनसुनवाई के समय इन मुद्दों को लोग सामने नहीं रख पाए। क्योंकि डीपीआर का पूरा अध्ययन नहीं किया गया था।
विज्ञापन
अब प्रभावित क्षेत्र का सीमांकन करने और जनसुनवाई की तिथि फिर से तय करने की मांग उठाते हुए कहा कि बांध को लेकर पैदा हुई संशय की स्थिति को समाप्त करना जरूरी है। साथ ही नए सिरे से होने वाली जनसुनवाई से पहले स्पष्ट सीमांकन किया जाए और लोगों को डूबने वाली जमीन का पूरा ब्योरा दिया जाए।
विज्ञापन