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राज्य गठन के बाद तेजी से बढ़ी बेरोजगारी
Updated Wed, 08 Nov 2017 10:47 PM IST
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पिथौरागढ़। उत्तराखंड राज्य गठन के पीछे एक मकसद स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना और यहां से पलायन को रोकना भी था, लेकिन राज्य बनने के बाद बेरोजगारी की भयावह तस्वीर सामने आ रही है।
रोजगार सृजन एवं कौशल विकास विभाग (सेवायोजन कार्यालय) के आंकड़ों को देखकर तो ऐसा लगता है कि राज्य गठन के बाद पुरुष बेरोजगारों की संख्या में चार फीसदी से अधिक और महिला बेरोजगारों की संख्या में करीब दस फीसदी की बढ़ोतरी हो गई। इसके विपरीत सरकारी नौकरी पाने वालों की संख्या में लगातार गिरावट आई है।
यदि अकेले पिथौरागढ़ जिले का संदर्भ लिया जाए तो राज्य गठन से पहले वर्ष 2000 में जिले में पंजीकृत पुरुष बेरोजगारों की संख्या 17685 और महिला बेरोजगारों की संख्या 2807 थी। राज्य गठन के बाद शिक्षित और प्रशिक्षित बेरोजगारों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होने लगी। इस समय जिले में पंजीकृत पुरुष बेरोजगारों की संख्या 72591 और महिला बेरोजगारों की संख्या 27781 पहुंच गई है।
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शिक्षा पूरी करने और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद हर बेरोजगार पंजीकरण अवश्य कराता है, ताकि कभी नौकरी का अवसर आने पर वह विधिवत आवेदन कर सके। बेरोजगारी की समस्या लगातार विकराल रूप ले रही है। इसी वजह से रोजगार की तलाश में पलायन भी बढ़ा है। जिला सेवायोजन अधिकारी डीएस रावत का कहना है कि पंजीकरण के लिए बेरोजगार रोज आते हैं। उनको पंजीकरण की सुविधा दी जाती है।
रोजगार मेलों के माध्यम से कुछ को मिली नौकरी
पिथौरागढ़। सेवायोजन कार्यालय ने समय-समय पर रोजगार मेलों का आयोजन कर युवाओं को प्रशिक्षण देने एवं प्रतिष्ठित कंपनियों में युवाओं को रोजगार देने का कार्यक्रम चलाया है। वर्ष 2011 से लगातार यह कार्यक्रम चल रहे हैं। जितने लोगों को प्रशिक्षण दिया जाता है, उनमें से कुछ को ही रोजगार मिल पाता है।
वर्ष प्रशिक्षण लिया रोजगार प्राप्त किया
2011 462 31
2012 177 100
2013 336 85
2014 40 12
2015 373 177
2016 339 104
2017 351 151
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रोजगार सृजन एवं कौशल विकास विभाग (सेवायोजन कार्यालय) के आंकड़ों को देखकर तो ऐसा लगता है कि राज्य गठन के बाद पुरुष बेरोजगारों की संख्या में चार फीसदी से अधिक और महिला बेरोजगारों की संख्या में करीब दस फीसदी की बढ़ोतरी हो गई। इसके विपरीत सरकारी नौकरी पाने वालों की संख्या में लगातार गिरावट आई है।
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यदि अकेले पिथौरागढ़ जिले का संदर्भ लिया जाए तो राज्य गठन से पहले वर्ष 2000 में जिले में पंजीकृत पुरुष बेरोजगारों की संख्या 17685 और महिला बेरोजगारों की संख्या 2807 थी। राज्य गठन के बाद शिक्षित और प्रशिक्षित बेरोजगारों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होने लगी। इस समय जिले में पंजीकृत पुरुष बेरोजगारों की संख्या 72591 और महिला बेरोजगारों की संख्या 27781 पहुंच गई है।
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शिक्षा पूरी करने और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद हर बेरोजगार पंजीकरण अवश्य कराता है, ताकि कभी नौकरी का अवसर आने पर वह विधिवत आवेदन कर सके। बेरोजगारी की समस्या लगातार विकराल रूप ले रही है। इसी वजह से रोजगार की तलाश में पलायन भी बढ़ा है। जिला सेवायोजन अधिकारी डीएस रावत का कहना है कि पंजीकरण के लिए बेरोजगार रोज आते हैं। उनको पंजीकरण की सुविधा दी जाती है।
रोजगार मेलों के माध्यम से कुछ को मिली नौकरी
पिथौरागढ़। सेवायोजन कार्यालय ने समय-समय पर रोजगार मेलों का आयोजन कर युवाओं को प्रशिक्षण देने एवं प्रतिष्ठित कंपनियों में युवाओं को रोजगार देने का कार्यक्रम चलाया है। वर्ष 2011 से लगातार यह कार्यक्रम चल रहे हैं। जितने लोगों को प्रशिक्षण दिया जाता है, उनमें से कुछ को ही रोजगार मिल पाता है।
वर्ष प्रशिक्षण लिया रोजगार प्राप्त किया
2011 462 31
2012 177 100
2013 336 85
2014 40 12
2015 373 177
2016 339 104
2017 351 151