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जिले में सूखे से अब तक 30 फीसदी फसल चौपट

Fri, 12 Jan 2018 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Fri, 12 Jan 2018 10:32 PM IST
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30 percent of the crop from the district so far
थल घाटी में सूखे से चौपट हो रही गेहूं की फसल - फोटो : अमर उजाला

जिले में अब तक शीतकालीन बारिश नहीं होने से फसलों का 30 फीसदी हिस्सा चौपट हो गया है। यदि जल्दी अच्छी बारिश नहीं होती तो यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा। सितंबर से बारिश न होने के कारण जिले में अधिकांश फसलों पर व्यापक असर पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में इस बार 26331 हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई गई है। अधिकतर किसानों ने कृषि विभाग से उन्नत प्रजाति का बीज खरीदकर बोया है। गेहूं की इस फसल में से मात्र 2757 हेक्टेयर में ही सिंचाई की सुविधा है। इस कारण ज्यादातर फसल को बारिश के पानी पर ही निर्भर रहना पड़ता है।

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जमीन में नमी कम होने के कारण इस बार कई स्थानों पर बीज अंकुरित नहीं हो पाए। जो बीज अंकुरित हुए हैं तो उनकी वृद्धि रुक गई है। मोटे तौर पर गेहूं की फसल को अब तक 30 फीसदी का नुकसान हो चुका है। इसी तरह जिले में जौ की फसल 3537 हेक्टेयर में बोई गई है। इसमें से मात्र 40 हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। जौ का उत्पादन लोग जानवरों के चारे और बीजों को पूजा पाठ में लाने के लिए करते हैं। जौ हालांकि मुख्य फसल नहीं है, लेकिन इसका महत्व काफी है। जौ की फसल पर भी 30 से 35 प्रतिशत तक असर पड़ा है। मसूर की फसल का क्षेत्र 4442 हेक्टेयर है। इसमें से मात्र 428 हेक्टेयर में ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। मसूर का महत्व सबसे ज्यादा है। कई परिवार तो सालभर के लिए दाल की व्यवस्था करने के बाद उसकी बिक्री भी करते आए हैं।
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इस बार मसूर का उत्पादन प्रभावित होने की पूरी आशंका है। इससे पहाड़ के गरीब किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि गेहूं, जौ और मसूर के लिए हालांकि धान, मडुवा की तरह बहुत ज्यादा पानी की जरूरत तो नहीं होती, लेकिन समय-समय पर पानी इस फसल के लिए भी आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि यदि नवंबर और दिसंबर में एक-दो बार अच्छी बारिश हो जाती तो फसलों को उगने तथा पनपने में आसानी हो जाती, लेकिन इस बार सितंबर से लेकर अब तक बारिश न होने से फसलों पर व्यापक असर पड़ा है। 
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सब्जियों पर पड़ा पाले का असर
जिले में शीतकाल में लाही, पालक, मेथी, धनिया जैसी सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। कुल 642 हेक्टेयर में इन सब्जियों को बोया जाता है, लेकिन बारिश से सब्जियों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। वैसे तो सब्जियों को उन स्थानों पर ही ज्यादा मात्रा में बोया जाता है, जहां पर पानी की सुविधा हो, लेकिन बारिश न होने से स्रोतों में पानी कम होने लगा है। पाले से भी सब्जी के पौधे खराब हुए हैं।

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