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ढाकर में साइकिल लेकर पहुंचे तीन युवा
Updated Mon, 07 May 2018 10:57 PM IST
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पिथौरागढ़। दारमा घाटी में साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्य से तीन युवाओं के दल ने ढाकर तक साइक्लिंग की। धारचूला से ढाकर तक 160 किमी की दूरी तय करने में दल को सप्ताह भर लगा। इस दौरान दल ने उच्च हिमालयी गांवों से होते हुए माउंटेन साइक्लिंग का ट्रैक तैयार किया।
29 अप्रैल को हिमालयन साइकिल क्लब के सदस्य पिथौरागढ़ निवासी चंद्रमोहन पांडेय, वीरेंद्र दरियाल, जगदीश भट्ट धारचूला से ढाकर के सफर पर रवाना हुए। इस बीच उन्होंने दारमा घाटी के प्रवेश द्वार ग्राम दर से होते हुए बोगलिंग, सेला, नागलिंग, बालिंग, दुग्तू, दांतू से ढाकर तक का सफर तय किया। सफलतापूर्वक दौरे के बाद दल लौट आया है। सीमांत में ढाकर तक साइक्लिंग का यह पहला मौका था।
दल का नेतृत्व करने वाले चंद्रमोहन पांडेय ने बताया कि साइक्लिंग का उद्देश्य दारमा घाटी में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। इससे पहले भी क्लब सदस्य वर्ष 2017 में लेह तक साइकिल से यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सीमांत के साहसिक पर्यटन की ओर सरकार ध्यान दे तो दारमा घाटी पर्यटकों से गुलजार हो सकती है। वीरेंद्र दरियाल और जगदीश भट्ट ने उम्मीद जताई कि इस यात्रा से सीमांत में साहसिक पर्यटन के प्रचार-प्रसार में मदद मिलेगी।
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29 अप्रैल को हिमालयन साइकिल क्लब के सदस्य पिथौरागढ़ निवासी चंद्रमोहन पांडेय, वीरेंद्र दरियाल, जगदीश भट्ट धारचूला से ढाकर के सफर पर रवाना हुए। इस बीच उन्होंने दारमा घाटी के प्रवेश द्वार ग्राम दर से होते हुए बोगलिंग, सेला, नागलिंग, बालिंग, दुग्तू, दांतू से ढाकर तक का सफर तय किया। सफलतापूर्वक दौरे के बाद दल लौट आया है। सीमांत में ढाकर तक साइक्लिंग का यह पहला मौका था।
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दल का नेतृत्व करने वाले चंद्रमोहन पांडेय ने बताया कि साइक्लिंग का उद्देश्य दारमा घाटी में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। इससे पहले भी क्लब सदस्य वर्ष 2017 में लेह तक साइकिल से यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सीमांत के साहसिक पर्यटन की ओर सरकार ध्यान दे तो दारमा घाटी पर्यटकों से गुलजार हो सकती है। वीरेंद्र दरियाल और जगदीश भट्ट ने उम्मीद जताई कि इस यात्रा से सीमांत में साहसिक पर्यटन के प्रचार-प्रसार में मदद मिलेगी।
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