{"_id":"59ad8bce4f1c1b03278b510a","slug":"21504545742-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कल से शुरू हो जाएगा श्राद्ध पक्ष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कल से शुरू हो जाएगा श्राद्ध पक्ष
Updated Mon, 04 Sep 2017 11:04 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। श्राद्ध पक्ष छह सितंबर से शुरू होगा। 13 और 14 सितंबर को अष्टमी और नवमी का श्राद्ध होगा। 20 सितंबर को अमावस्या होगी। जो लोग श्राद्ध पक्ष में अपने पितरों का श्राद्ध नहीं कर पाए होंगे वह अमावस्या को पितृ विसर्जन के दिन श्राद्ध कर सकते हैं। इस बार तिथि क्रम के अनुसार कोई भी श्राद्ध खंडित नहीं है। श्राद्ध का पक्ष समाप्त होते ही 21 सितंबर से शारदीय नवरात्र शुरू हो जाएंगे।
पंडित आनंद बल्लभ जोशी ने बताया कि श्राद्ध पक्ष का बड़ा महत्व है। हर व्यक्ति को अपने दिवंगत माता-पिता, परिजनों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध जरूर करना चाहिए। घर पर ब्राह्मण बुलाकर पूरी श्रद्धा के साथ पितरों का तर्पण किया जाए और उनके नाम से शुद्ध भोजन तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि मृतक की तिथि के दिन श्राद्ध करने वालों को भी श्राद्ध पक्ष में एक दिन चुनकर अवश्य अपने पितरों को याद करना चाहिए। पितरों की कृपा से फल मिलते हैं और जीवन सुखी होता है।
पंडित जोशी ने बताया कि जो लोग अष्टमी को अपने पिता का श्राद्ध करते हैं वह इसी तिथि को करेंगे। नवमी को मातृ नवमी कहा जाता है, इस दिन दिवंगत माता का श्राद्ध होता है। ज्यादातर लोग नवमी की तिथि तक श्राद्ध कर लेते हैं। यदि किसी इस अवधि में कोई अपने पितरों का श्राद्ध नहीं कर पाता तो वह पितृ विसर्जन अमावस्या को अपने पितरों को जरूर याद कर ले। उन्होंने कहा कि श्राद्ध पक्ष में अन्य धार्मिक कार्य वर्जित रहते हैं। इस पक्ष में सिर्फ पितरों को ही याद किया जाता है। पंडित जोशी ने कहा कि श्राद्ध का अर्थ ही श्रद्धा है। अपने दिवंगत पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का यही सबसे उचित समय होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पंडित आनंद बल्लभ जोशी ने बताया कि श्राद्ध पक्ष का बड़ा महत्व है। हर व्यक्ति को अपने दिवंगत माता-पिता, परिजनों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध जरूर करना चाहिए। घर पर ब्राह्मण बुलाकर पूरी श्रद्धा के साथ पितरों का तर्पण किया जाए और उनके नाम से शुद्ध भोजन तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि मृतक की तिथि के दिन श्राद्ध करने वालों को भी श्राद्ध पक्ष में एक दिन चुनकर अवश्य अपने पितरों को याद करना चाहिए। पितरों की कृपा से फल मिलते हैं और जीवन सुखी होता है।
विज्ञापन
पंडित जोशी ने बताया कि जो लोग अष्टमी को अपने पिता का श्राद्ध करते हैं वह इसी तिथि को करेंगे। नवमी को मातृ नवमी कहा जाता है, इस दिन दिवंगत माता का श्राद्ध होता है। ज्यादातर लोग नवमी की तिथि तक श्राद्ध कर लेते हैं। यदि किसी इस अवधि में कोई अपने पितरों का श्राद्ध नहीं कर पाता तो वह पितृ विसर्जन अमावस्या को अपने पितरों को जरूर याद कर ले। उन्होंने कहा कि श्राद्ध पक्ष में अन्य धार्मिक कार्य वर्जित रहते हैं। इस पक्ष में सिर्फ पितरों को ही याद किया जाता है। पंडित जोशी ने कहा कि श्राद्ध का अर्थ ही श्रद्धा है। अपने दिवंगत पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का यही सबसे उचित समय होता है।
विज्ञापन