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बेहोशी की हालत में चोटी पर मिली महिला
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कनालीछीना/पिथौरागढ़। विकासखंड के मितड़ा गांव में बकरी चराने के दौरान जंगल से लापता हुई महिला 28 घंटे बाद बेहोशी की हालत में एक पहाड़ी पर मिली। महिला को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। तेंदुए के बकरियों पर हुए हमले से बेहद डरी महिला बोल नहीं पा रही है।
कनालीछीना के मितड़ा गांव निवासी जगदीश पाटनी की पत्नी पुष्पा पाटनी रविवार शाम चार बजे चरने गई बकरियों को लेने जंगल गई थी, लेकिन लौटी नहीं। देर शाम तक उसके और बकरियों के घर नहीं लौटने पर चिंतित परिजनों ने उसकी ढूंढ़खोज की, लेकिन रात होने के कारण कोई पता नहीं चल सका। सोमवार को राजस्व और वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के साथ ढूंढ़खोज की। इस दौरान तेंदुए के खाए छह बकरियों के शव देखे गए।
रात लगभग आठ बजे एक पहाड़ी पर महिला पत्थर की ओर में बेहोश पड़ी मिली। इसके बाद महिला को देर रात बेहोशी की हालत में घर लाया गया। भूखी प्यासी और ठंड से कांप रही पुष्पा को घर लाने के बाद होश आया लेकिन बेहद डरी होने के कारण वह कुछ बोल नहीं पाई। मंगलवार सुबह परिजन 108 एंबुलेंस से उसे जिला अस्पताल लाए। जहां पर उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार है। हालांकि अभी भी भय के कारण बोल नहीं पा रही है।
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कनालीछीना के मितड़ा गांव निवासी जगदीश पाटनी की पत्नी पुष्पा पाटनी रविवार शाम चार बजे चरने गई बकरियों को लेने जंगल गई थी, लेकिन लौटी नहीं। देर शाम तक उसके और बकरियों के घर नहीं लौटने पर चिंतित परिजनों ने उसकी ढूंढ़खोज की, लेकिन रात होने के कारण कोई पता नहीं चल सका। सोमवार को राजस्व और वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के साथ ढूंढ़खोज की। इस दौरान तेंदुए के खाए छह बकरियों के शव देखे गए।
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रात लगभग आठ बजे एक पहाड़ी पर महिला पत्थर की ओर में बेहोश पड़ी मिली। इसके बाद महिला को देर रात बेहोशी की हालत में घर लाया गया। भूखी प्यासी और ठंड से कांप रही पुष्पा को घर लाने के बाद होश आया लेकिन बेहद डरी होने के कारण वह कुछ बोल नहीं पाई। मंगलवार सुबह परिजन 108 एंबुलेंस से उसे जिला अस्पताल लाए। जहां पर उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार है। हालांकि अभी भी भय के कारण बोल नहीं पा रही है।
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