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फर्नीचर नहीं मिला तो जमीन में बैठकर देनी पड़ेगी बोर्ड परीक्षा
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पिथौरागढ़। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में फर्नीचर का अभाव बना हुआ है। इसके चलते छात्र-छात्राओं को पढ़ाई में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए कई स्कूलों ने शिक्षा विभाग को फर्नीचर की मांग की है। फर्नीचर नहीं मिला तो बोर्ड परीक्षार्थियों को जमीन में बैठकर परीक्षा देनी पड़ सकती है।
जिले के 215 इंटर कॉलेज और माध्यमिक विद्यालयों में 37440 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से 27421 छात्र-छात्राओं के लिए फर्नीचर है। विद्यालयों में 10070 फर्नीचर सेटों की आवश्यकता है। जिला मुख्यालय के केनयू राइंका, एसडीएस, राबाइंका, ऐंचोली, झूलाघाट, बड़ाबे, पीपलकोट, थरकोट, गौड़ीहाट, दोबांस, मूनाकोट, देवलथल, मुवानी, सिंगाली, डीडीहाटधारचूला, बलुवाकोट, उच्छैती, जौलजीबी, बरम, पैय्यापौड़ी, मुनस्यारी, मवानी दवानी समेत दूरस्थ के विद्यालयों में भी फर्नीचर का टोटा बना हुआ है। फर्नीचर के अभाव में छात्र-छात्राओं को सर्दी हो या गर्मी जमीन पर बैठने को मजबूर होना पड़ता है।
विद्यालयों की ओर से फर्नीचर की मांग की गई है, लेकिन लगता नहीं कि इतनी जल्दी फर्नीचर उपलब्ध हो पाएगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार जुकरिया का कहना है कि विद्यालयों को विधायक निधि, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और कहीं पर बीएडीपी मद से फर्नीचर उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में फर्नीचर की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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जिले के 215 इंटर कॉलेज और माध्यमिक विद्यालयों में 37440 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से 27421 छात्र-छात्राओं के लिए फर्नीचर है। विद्यालयों में 10070 फर्नीचर सेटों की आवश्यकता है। जिला मुख्यालय के केनयू राइंका, एसडीएस, राबाइंका, ऐंचोली, झूलाघाट, बड़ाबे, पीपलकोट, थरकोट, गौड़ीहाट, दोबांस, मूनाकोट, देवलथल, मुवानी, सिंगाली, डीडीहाटधारचूला, बलुवाकोट, उच्छैती, जौलजीबी, बरम, पैय्यापौड़ी, मुनस्यारी, मवानी दवानी समेत दूरस्थ के विद्यालयों में भी फर्नीचर का टोटा बना हुआ है। फर्नीचर के अभाव में छात्र-छात्राओं को सर्दी हो या गर्मी जमीन पर बैठने को मजबूर होना पड़ता है।
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विद्यालयों की ओर से फर्नीचर की मांग की गई है, लेकिन लगता नहीं कि इतनी जल्दी फर्नीचर उपलब्ध हो पाएगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार जुकरिया का कहना है कि विद्यालयों को विधायक निधि, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और कहीं पर बीएडीपी मद से फर्नीचर उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में फर्नीचर की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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