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19 हजार मीट्रिक टन नींबू प्रजाति के फलों का उत्पादन होगा
Updated Thu, 06 Dec 2018 10:35 PM IST
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पिथौरागढ़। मौसम में बदलाव के चलते जहां सीमांत जिले में नींबू प्रजाति के फलों का उत्पादन काफी कम रह गया है, वहीं उद्यान विभाग का दावा है कि वर्ष 2018-19 में 19 हजार मीट्रिक टन उत्पादन होगा। इसमें मुख्यतया माल्टा शामिल है। विभाग ने ए ग्रेड माल्टा की दर 16, बी ग्रेड का 13 और सी ग्रेड की सात रुपये प्रति किलो निर्धारित की है।
मुख्य उद्यान अधिकारी डॉ. मीनाक्षी जोशी ने बताया कि वर्ष 2015 से माल्टा खरीद के लिए उत्तराखंड औद्यानिक विपणन परिषद देहरादून द्वारा विभागीय सहयोग से डीडीहाट, कनालीछीना, बेड़ीनाग में दिसंबर में क्रय केंद्रों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन वर्ष 2015 के बाद क्रय केंद्रों पर माल्टा बिक्री के लिए किसान नहीं आए। बताया कि माल्टा का अधिकतम उपयोग जूस बनाने में होता है। वर्तमान में उद्यान विभाग के अंतर्गत राजकीय फल संरक्षण केंद्र पिथौरागढ़, डीडीहाट, धारचूला में नवंबर से जनवरी तक लोगों द्वारा करीब 15 हजार लीटर माल्टा का जूस और पांच हजार लीटर संतरे का जूस तैयार करवाया जाता है।
डॉ. मीनाक्षी ने बताया कि कनालीछीना स्थित फल संरक्षण केंद्र को आजीविका सहयोग परियोजना को हस्तांतरित कर दिया गया है। बताया कि जिला मुख्यालय में ही विभाग के अतिरिक्त चार निजी फल संरक्षण केंद्र हैं। इसके अलावा डीडीहाट, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट में भी फल संरक्षण केंद्रों में जूस तैयार किया जाता है।
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बाजार में 30 रुपये किलो बिक रहा माल्टा
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में नींबू प्रजाति के फलों का उत्पादन अब काफी कम रह गया है। अधिकतर स्थानों पर पुराने पेड़ खत्म हो गए हैं। नए पेड़ों में अब फल पहले की तरह नहीं रहा। इसका कारण मौसम में बदलाव बताया जा रहा है। जिन स्थानों पर थोड़ा बहुत माल्टा, संतरा बचा है, उसका किसानों को अच्छा दाम मिल रहा है। उत्पादन कम होने से बाजार में माल्टा 30 तो संतरा 60 रुपये किलो तक बिक रहा है।
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मुख्य उद्यान अधिकारी डॉ. मीनाक्षी जोशी ने बताया कि वर्ष 2015 से माल्टा खरीद के लिए उत्तराखंड औद्यानिक विपणन परिषद देहरादून द्वारा विभागीय सहयोग से डीडीहाट, कनालीछीना, बेड़ीनाग में दिसंबर में क्रय केंद्रों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन वर्ष 2015 के बाद क्रय केंद्रों पर माल्टा बिक्री के लिए किसान नहीं आए। बताया कि माल्टा का अधिकतम उपयोग जूस बनाने में होता है। वर्तमान में उद्यान विभाग के अंतर्गत राजकीय फल संरक्षण केंद्र पिथौरागढ़, डीडीहाट, धारचूला में नवंबर से जनवरी तक लोगों द्वारा करीब 15 हजार लीटर माल्टा का जूस और पांच हजार लीटर संतरे का जूस तैयार करवाया जाता है।
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डॉ. मीनाक्षी ने बताया कि कनालीछीना स्थित फल संरक्षण केंद्र को आजीविका सहयोग परियोजना को हस्तांतरित कर दिया गया है। बताया कि जिला मुख्यालय में ही विभाग के अतिरिक्त चार निजी फल संरक्षण केंद्र हैं। इसके अलावा डीडीहाट, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट में भी फल संरक्षण केंद्रों में जूस तैयार किया जाता है।
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बाजार में 30 रुपये किलो बिक रहा माल्टा
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में नींबू प्रजाति के फलों का उत्पादन अब काफी कम रह गया है। अधिकतर स्थानों पर पुराने पेड़ खत्म हो गए हैं। नए पेड़ों में अब फल पहले की तरह नहीं रहा। इसका कारण मौसम में बदलाव बताया जा रहा है। जिन स्थानों पर थोड़ा बहुत माल्टा, संतरा बचा है, उसका किसानों को अच्छा दाम मिल रहा है। उत्पादन कम होने से बाजार में माल्टा 30 तो संतरा 60 रुपये किलो तक बिक रहा है।