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शहादत दिवस पर शौर्य चक्र विजेता को श्रद्धांजलि देने कोई नहीं पहुंचा
Updated Wed, 22 Aug 2018 10:52 PM IST
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पिथौरागढ़। सोमालिया में शहीद हुए पिथौरागढ़ के जांबाज शौर्य चक्र विजेता देवेंद्र चंद की शहादत को भुला दिया गया। बुधवार को उनकी शहादत दिवस पर सेना या प्रशासन की ओर से श्रद्धांजलि देने कोई नहीं पहुंचा। इससे आहत शहीद के परिजनों ने घर में ही फूलों की माला अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
जिले के आठगांव शिलिंग क्षेत्र के बुंगा निवासी देवेंद्र चंद वर्ष 1991 में सेना की पांच महर रेजीमेंट में भर्ती हुए। वर्ष 1994 में वह सोमालिया में शांति सेना में तैनात थे। 22 अगस्त को वे शहीद हो गए। उनके अदम्य साहस को देखते हुए भारत सरकार की ओर से उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र प्रदान किया गया।
जिला मुख्यालय के टकाना तिराहे के समीप उनकी प्रतिमा बनाई गई। जहां हर वर्ष 22 अगस्त को उनकी पुण्यतिथि पर सेना, प्रशासन की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती थी। इस वर्ष उनकी शहादत दिवस पर उनकी मूर्ति में माल्यार्पण करने कोई नहीं पहुंचा। शहीद देवेंद्र का स्मारक वीरान पड़ा रहा। उनकी प्रतिमा में फूल तक नहीं चढ़ाए गए। इससे परिजन खासे आहत नजर आए। शहीद के अग्रज विक्रम चंद ने बताया कि पिछले साल तक उन्हें पहले ही श्रद्धांजलि कार्यक्रम की सूचना दे दी जाती थी। इस साल उनके शहीद भाई को श्रद्धांजलि देने कोई नहीं पहुंचा।
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जिले के आठगांव शिलिंग क्षेत्र के बुंगा निवासी देवेंद्र चंद वर्ष 1991 में सेना की पांच महर रेजीमेंट में भर्ती हुए। वर्ष 1994 में वह सोमालिया में शांति सेना में तैनात थे। 22 अगस्त को वे शहीद हो गए। उनके अदम्य साहस को देखते हुए भारत सरकार की ओर से उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र प्रदान किया गया।
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जिला मुख्यालय के टकाना तिराहे के समीप उनकी प्रतिमा बनाई गई। जहां हर वर्ष 22 अगस्त को उनकी पुण्यतिथि पर सेना, प्रशासन की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती थी। इस वर्ष उनकी शहादत दिवस पर उनकी मूर्ति में माल्यार्पण करने कोई नहीं पहुंचा। शहीद देवेंद्र का स्मारक वीरान पड़ा रहा। उनकी प्रतिमा में फूल तक नहीं चढ़ाए गए। इससे परिजन खासे आहत नजर आए। शहीद के अग्रज विक्रम चंद ने बताया कि पिछले साल तक उन्हें पहले ही श्रद्धांजलि कार्यक्रम की सूचना दे दी जाती थी। इस साल उनके शहीद भाई को श्रद्धांजलि देने कोई नहीं पहुंचा।
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