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अधिसूचना निरस्त होते ही पुराने स्वरूप में लौटी पालिका
Updated Fri, 09 Mar 2018 10:44 PM IST
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पिथौरागढ़। हाइकोर्ट की ओर से निकाय सीमा विस्तार की अधिसूचना निरस्त होने के बाद पिथौरागढ़ नगर पालिका अपने पुराने स्वरूप में लौट आई है। इसके साथ ही सीमा विस्तार में शामिल की गई छह ग्राम सभाएं पालिका क्षेत्र से बाहर अपने स्वतंत्र रूप में लौट आई हैं।
सरकार ने जिले में पिथौरागढ़ नगर पालिका का सीमा विस्तार किया था। इसके तहत छह ग्रामसभाओं धनौड़ा, नेड़ा, बस्ते, ऐंचोली, चंडाक, दौला को पालिका के विस्तार में शामिल किया गया था। इन गांवों को नगरी क्षेत्र में मिलाकर पांच नए वार्ड बनाए गए थे। इसके साथ ही पालिका में वार्डों की संख्या बढ़कर 20 हो गई थी।
सरकार ने परिसीमन के लिए गलत तथ्य पेश किए
नगर पालिका विस्तार के खिलाफ पिथौरागढ़ के दौला ग्राम प्रधान भूपेश नगरकोटी ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी। अदालत का फैसला आने के बाद प्रधान नगरकोटी ने इसे संघर्ष की जीत बताया है। परिसीमन की कवायद शुरू होने से लेकर अब तक इसके खिलाफ संघर्ष कर रहे नगरकोटी को अपने जन्मदिन पर अदालत के फैसले के रूप में एक तोहफा मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मनमाने तरीके से परिसीमन किया। जनता को सुनवाई का मौका तक नहीं दिया। परिसीमन में गलत तरीके से आपत्तियां पेश की गई। परिसीमन के दौरान ग्रामसभाओं के संबंध में गलत तथ्य रखे गए, लेकिन अब अदालत के आदेश से सब साफ हो गया है।
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कांग्रेस में खुशी, भाजपा में गम
अधिसूचना निरस्त होने के बाद कांग्रेसी खेमे में खुशी, जबकि भाजपा में निराशा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत का कहना है कि भाजपा सरकार जबरन सीमा विस्तार का फैसला ग्रामीण क्षेत्रों पर थोप रही थी। जनता के विरोध के बाद भी पालिका का परिसीमन किया गया। इससे ग्रामीणों पर तरह-तरह के कर लगते। नतीजतन ग्राम पंचायतों को हाइकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। दूसरी ओर भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र वल्दिया का कहना है कि सरकार ने जनहित को देखते हुए परिसीमन का फैसला किया था। ग्रामीण इलाके की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। नगर पालिका में शामिल होने के बाद ग्रामीणों को ज्यादा सुविधा मिलती। ज्यादा बजट मिलने से नागरिक सुविधाओं का विस्तार होता।
ग्रामीणों ने आतिशबाजी से खुशी मनाई
ग्रामीणों ने परिसीमन निरस्त होने के बाद आतिशबाजी और मिठाई बांटकर खुशी जताई। ऐंचोली में ग्रामीणों ने फैसले के पक्ष में नारेबाजी की। क्षेत्र पंचायत सदस्य दिनेश पांडेय के नेतृत्व में ग्राम प्रधान प्रेमराम, उपप्रधान पुष्कर रावत समेत कई ग्रामीणों ने आतिशबाजी की। इस दौरान चंद्रकांत पांडेय, प्रकाश पांडे, भूपेंद्र बेलाल, धर्मेंद्र मेहता, गुड्डू रावत, चिराग रावत आदि थे। दूसरी ओर दौला, चंडाक, धनौड़ा, बस्ते, नेड़ा गांव में भी ग्रामीणों ने भी फैसले पर खुशी जताई।
नगर पालिका जनसुनवाई करेगी
हाइकोर्ट के आदेश के बाद नगर पालिका परिसीमन के मामले में जन सुनवाई करेगी। हालांकि अभी अदालत का फैसला नहीं मिला है। फैसला मिलने के बाद ही नगर पालिका सरकार के निर्देश पर ग्राम पंचायतों में जनसुनवाई करेगी। ईओ खीमानंद जोशी का कहना है कि लिखित फैसला मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
ग्रामीण शुरू से ही परिसीमन का विरोध कर रहे थे। नगरपालिका क्षेत्र में पहले से ही अव्यवस्थाओं की भरमार है। इससे ग्राम पंचायतों को सीधा लाभ नहीं मिलता। उल्टा ग्रामीणों पर कर थोप दिए जाते। -पार्वती खंपा, ग्राम प्रधान, चंडाक
परिसीमन के बाद ग्राम सभाओं का स्वतंत्र अस्तित्व खत्म हो जाता। ग्रामीण शुरू से ही इसका विरोध कर रहे थे, लेकिन सरकार ने बिना आपत्तियां सुने मनमाने तरीके से अधिसूचना जारी कर दी। -दिनेश पांडे, क्षेपं सदस्य, ऐंचोली
हाइकोर्ट का आदेश अभी नहीं मिला है। आदेश के अनुसार अगला कदम उठाया जाएगा। -वंदना सिंह, प्रभारी डीएम, पिथौरागढ़
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सरकार ने जिले में पिथौरागढ़ नगर पालिका का सीमा विस्तार किया था। इसके तहत छह ग्रामसभाओं धनौड़ा, नेड़ा, बस्ते, ऐंचोली, चंडाक, दौला को पालिका के विस्तार में शामिल किया गया था। इन गांवों को नगरी क्षेत्र में मिलाकर पांच नए वार्ड बनाए गए थे। इसके साथ ही पालिका में वार्डों की संख्या बढ़कर 20 हो गई थी।
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सरकार ने परिसीमन के लिए गलत तथ्य पेश किए
नगर पालिका विस्तार के खिलाफ पिथौरागढ़ के दौला ग्राम प्रधान भूपेश नगरकोटी ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी। अदालत का फैसला आने के बाद प्रधान नगरकोटी ने इसे संघर्ष की जीत बताया है। परिसीमन की कवायद शुरू होने से लेकर अब तक इसके खिलाफ संघर्ष कर रहे नगरकोटी को अपने जन्मदिन पर अदालत के फैसले के रूप में एक तोहफा मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मनमाने तरीके से परिसीमन किया। जनता को सुनवाई का मौका तक नहीं दिया। परिसीमन में गलत तरीके से आपत्तियां पेश की गई। परिसीमन के दौरान ग्रामसभाओं के संबंध में गलत तथ्य रखे गए, लेकिन अब अदालत के आदेश से सब साफ हो गया है।
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कांग्रेस में खुशी, भाजपा में गम
अधिसूचना निरस्त होने के बाद कांग्रेसी खेमे में खुशी, जबकि भाजपा में निराशा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत का कहना है कि भाजपा सरकार जबरन सीमा विस्तार का फैसला ग्रामीण क्षेत्रों पर थोप रही थी। जनता के विरोध के बाद भी पालिका का परिसीमन किया गया। इससे ग्रामीणों पर तरह-तरह के कर लगते। नतीजतन ग्राम पंचायतों को हाइकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। दूसरी ओर भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र वल्दिया का कहना है कि सरकार ने जनहित को देखते हुए परिसीमन का फैसला किया था। ग्रामीण इलाके की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। नगर पालिका में शामिल होने के बाद ग्रामीणों को ज्यादा सुविधा मिलती। ज्यादा बजट मिलने से नागरिक सुविधाओं का विस्तार होता।
ग्रामीणों ने आतिशबाजी से खुशी मनाई
ग्रामीणों ने परिसीमन निरस्त होने के बाद आतिशबाजी और मिठाई बांटकर खुशी जताई। ऐंचोली में ग्रामीणों ने फैसले के पक्ष में नारेबाजी की। क्षेत्र पंचायत सदस्य दिनेश पांडेय के नेतृत्व में ग्राम प्रधान प्रेमराम, उपप्रधान पुष्कर रावत समेत कई ग्रामीणों ने आतिशबाजी की। इस दौरान चंद्रकांत पांडेय, प्रकाश पांडे, भूपेंद्र बेलाल, धर्मेंद्र मेहता, गुड्डू रावत, चिराग रावत आदि थे। दूसरी ओर दौला, चंडाक, धनौड़ा, बस्ते, नेड़ा गांव में भी ग्रामीणों ने भी फैसले पर खुशी जताई।
नगर पालिका जनसुनवाई करेगी
हाइकोर्ट के आदेश के बाद नगर पालिका परिसीमन के मामले में जन सुनवाई करेगी। हालांकि अभी अदालत का फैसला नहीं मिला है। फैसला मिलने के बाद ही नगर पालिका सरकार के निर्देश पर ग्राम पंचायतों में जनसुनवाई करेगी। ईओ खीमानंद जोशी का कहना है कि लिखित फैसला मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
ग्रामीण शुरू से ही परिसीमन का विरोध कर रहे थे। नगरपालिका क्षेत्र में पहले से ही अव्यवस्थाओं की भरमार है। इससे ग्राम पंचायतों को सीधा लाभ नहीं मिलता। उल्टा ग्रामीणों पर कर थोप दिए जाते। -पार्वती खंपा, ग्राम प्रधान, चंडाक
परिसीमन के बाद ग्राम सभाओं का स्वतंत्र अस्तित्व खत्म हो जाता। ग्रामीण शुरू से ही इसका विरोध कर रहे थे, लेकिन सरकार ने बिना आपत्तियां सुने मनमाने तरीके से अधिसूचना जारी कर दी। -दिनेश पांडे, क्षेपं सदस्य, ऐंचोली
हाइकोर्ट का आदेश अभी नहीं मिला है। आदेश के अनुसार अगला कदम उठाया जाएगा। -वंदना सिंह, प्रभारी डीएम, पिथौरागढ़