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पिथौरागढ़ नगर की दीवारों पर आठूं और चैतोल के चित्र भी देखिए
Updated Wed, 28 Jun 2017 11:43 PM IST
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आठूं और चैतोल का चित्रण किया
पिथौरागढ़। यहां चल रही भित्तिचित्र कार्यशाला के दूसरे दिन बुधवार को विकास भवन के सामने की खाली दीवारों पर चित्रकारों ने लोकपर्व आठूं और चैतोल के सजीव चित्र तैयार किए। आठूं पर्व सितंबर में मनाया जाता है। पूरे जिले में व्यापक स्तर पर मनाने वाले इस पर्व के दौरान भगवान शिव, पार्वती की उपासना की जाती है, जबकि चैतोल के समय लोकदेवता देवत समेत की छतरी, डोले को लेकर भक्त सोरघाटी के 22 गांवों में जाते हैं। विभिन्न शहरों से आए चित्रकारों ने बताया कि उनको संस्कृति पर आधारित एकदम नए चित्र गढ़ने में बेहद आनंद की अनुभूति हो रही है।
सोर कलाकार कल्याण समिति के संरक्षक ललित मोहन कापड़ी, संयोजक हरीश चंद्र गहतोड़ी ने बताया कि यह चित्र नई पीढ़ी को संस्कृति की जड़ों की तरफ ले जाएंगे साथ ही यहां आने वाले पर्यटकों की जिज्ञासा को भी शांत करेंगे। मुजफ्फरनगर से आए चित्रकार प्रवीण सैनी, प्रदीप सैनी, हल्द्वानी के जगदीश पांडे, चंपावत के हरीश चंद्र, अल्मोड़ा के गोकुल वाणी, स्थानीय चित्रकार प्रेमा पाटनी, निशु पुनेठा, दीपक खेलाल, सुनील लोहिया ने बेहद आकर्षक भित्ति चित्रण किया है।
इस आयोजन को समाजसेवी ज्योति प्रकाश पुनेड़ा, मोहन लाल वर्मा, गोविंद सिंह बिष्ट, पतंजलि योग समिति की जिला प्रमुख रीता कापड़ी का सहयोग मिल रहा है। चित्रकार प्रवीण सैनी ने कहा कि पिथौरागढ़ नगर सांस्कृतिक चेतना का गढ़ है। वह भविष्य में भी यहां आकर संस्कृति पर आधारित चित्रों को तैयार करेंगे। नगर में अब तक खाली दीवारों पर बेहतरीन चित्र बन जाने से लोगों को सुकून महसूस हो रहा है। पहली बार इस दिशा में पहल हुई है। नगर को सुंदर बनाने के लिए सरकारी स्तर पर कई बार बैठकें तो होती हैं लेकिन व्यावहारिक रूप से सामने लाने का प्रयास किसी भी स्तर पर नहीं किया जाता। सोर कलाकार कल्याण समिति ने बिना किसी आर्थिक सहयोग के इस काम को किया है।
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पिथौरागढ़ नगर की दीवारों पर दुर्लभ चित्र देखिए
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पिथौरागढ़। यहां चल रही भित्तिचित्र कार्यशाला के दूसरे दिन बुधवार को विकास भवन के सामने की खाली दीवारों पर चित्रकारों ने लोकपर्व आठूं और चैतोल के सजीव चित्र तैयार किए। आठूं पर्व सितंबर में मनाया जाता है। पूरे जिले में व्यापक स्तर पर मनाने वाले इस पर्व के दौरान भगवान शिव, पार्वती की उपासना की जाती है, जबकि चैतोल के समय लोकदेवता देवत समेत की छतरी, डोले को लेकर भक्त सोरघाटी के 22 गांवों में जाते हैं। विभिन्न शहरों से आए चित्रकारों ने बताया कि उनको संस्कृति पर आधारित एकदम नए चित्र गढ़ने में बेहद आनंद की अनुभूति हो रही है।
सोर कलाकार कल्याण समिति के संरक्षक ललित मोहन कापड़ी, संयोजक हरीश चंद्र गहतोड़ी ने बताया कि यह चित्र नई पीढ़ी को संस्कृति की जड़ों की तरफ ले जाएंगे साथ ही यहां आने वाले पर्यटकों की जिज्ञासा को भी शांत करेंगे। मुजफ्फरनगर से आए चित्रकार प्रवीण सैनी, प्रदीप सैनी, हल्द्वानी के जगदीश पांडे, चंपावत के हरीश चंद्र, अल्मोड़ा के गोकुल वाणी, स्थानीय चित्रकार प्रेमा पाटनी, निशु पुनेठा, दीपक खेलाल, सुनील लोहिया ने बेहद आकर्षक भित्ति चित्रण किया है।
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इस आयोजन को समाजसेवी ज्योति प्रकाश पुनेड़ा, मोहन लाल वर्मा, गोविंद सिंह बिष्ट, पतंजलि योग समिति की जिला प्रमुख रीता कापड़ी का सहयोग मिल रहा है। चित्रकार प्रवीण सैनी ने कहा कि पिथौरागढ़ नगर सांस्कृतिक चेतना का गढ़ है। वह भविष्य में भी यहां आकर संस्कृति पर आधारित चित्रों को तैयार करेंगे। नगर में अब तक खाली दीवारों पर बेहतरीन चित्र बन जाने से लोगों को सुकून महसूस हो रहा है। पहली बार इस दिशा में पहल हुई है। नगर को सुंदर बनाने के लिए सरकारी स्तर पर कई बार बैठकें तो होती हैं लेकिन व्यावहारिक रूप से सामने लाने का प्रयास किसी भी स्तर पर नहीं किया जाता। सोर कलाकार कल्याण समिति ने बिना किसी आर्थिक सहयोग के इस काम को किया है।
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पिथौरागढ़ नगर की दीवारों पर दुर्लभ चित्र देखिए