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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   19 वर्ष पहले भी चरम पर पहुंचा था सीमा पर विवाद

19 वर्ष पहले भी हुआ था सीमा पर विवाद

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 22 May 2020 03:12 PM IST
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19 वर्ष पहले भी चरम पर पहुंचा था सीमा पर विवाद
19 वर्ष पहले अभाविप की यात्रा में शामिल लोग। - फोटो : AMAR UJALA
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़। भारत-नेपाल सीमा पर वर्ष 2001 में विवाद चरम पर पहुंच गया था। तब दोनों देशों के मैत्री संबंधों को मजबूत करने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने कुटी से लेकर टनकपुर तक 503 किमी की पदयात्रा की थी।
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भारतीय क्षेत्र को अपने नक्शे में शामिल कर नेपाल ने फिर से विवाद खड़ा कर दिया है। 2001 में कालापानी को लेकर विवाद काफी बढ़ गया था। सीमा पर तनाव को कम करने और दोनों देशों के संबंधों की मजबूती के लिए अभाविप के 11 कार्यकर्ताओं ने 20 अक्टूबर को भारत के अंतिम गांव धारचूला के कुटी से टनकपुर तक 22 दिनों तक पदयात्रा की। अभाविप के तत्कालीन प्रदेश संगठन मंत्री और वर्तमान में उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने भारत मां का भाल बचाने, भारत मां के लाल चले, भारत-नेपाल एकता जिंदाबाद के नारे के साथ 22 दिन में 503 किमी की यात्रा कर 286 गांवों में जागरण अभियान चलाया। इसे राष्ट्रीय सुरक्षा जन जागरण पदयात्रा नाम दिया गया। यात्रा में शामिल अभाविप के तत्कालीन सह प्रमुख गिरीश जोशी ने बताया कि तब आर्थिक संसाधन बेहद कम थे। उच्च हिमालयी क्षेत्र में कार्यकर्ताओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सात कार्यकर्ता तो बीमार भी हो गए। बावजूद इसके उनके हौंसले बुलंद रहे। कुटी, आदि कैलाश से यात्रा काली नदी के किनारे-किनारे चंपावत के पंचेश्वर, चूका होते हुए टनकपुर पहुंची। उनका कहना है कि विवाद का समाधान जल्द हो जाएगा। दोनों देशों के लोगों को समझदारी दिखाते हुए आपसी संबंधों को और मजबूत बनाना होगा।
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