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भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में खनन की अनुमति देने से गुस्सा
Updated Mon, 11 Dec 2017 11:34 PM IST
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मुनस्यारी तहसील के भूस्खलन से प्रभावित भैंसखाल और रसियाबगड़ वन पंचायत के पास बहने वाली रामगंगा में खनन की अनुमति देने से लोगों में भारी गुस्सा है। इलाके में बारिश के मौसम में भारी भूस्खलन होता है। पिछले साल भी नदी से आंशिक रूप से खनन की अनुमति दी गई थी। खनन के कारण रामगंगा का प्रवाह तक पलट गया और नदी गांव की तरफ बहने लगी है। इससे भविष्य में गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने खनन की अनुमति देने के बजाए भूकटाव से सुरक्षा के उपाय करने की मांग की है।
शासन ने नौ नवंबर को जारी आदेश में भैंसखाल और रसियाबगड़ को भी खनन के लिए चिन्हित किया है। साथ ही इसके लिए निविदा आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भैंसखाल की ग्राम प्रधान चंद्रकला दानू, सरपंच द्रौपदी देवी, रसियाबगड़ की सरपंच तुलसी देवी ने जिलाधिकारी को पत्र देकर कहा है कि भूस्खलन की दृष्टि से अति संवेदनशील इस इलाके में खनन की अनुमति देना गलत है। कहा कि जिस स्थान को खनन के लिए चुना गया है, उसके पूर्व दिशा में हरड़िया नाला और पश्चिम दिशा में रातीगाड़ है।
इन दोनों स्थानों पर जबर्दस्त भूकटाव होता है। थल-मुनस्यारी सड़क इसी क्षेत्र से होकर जाती है। भूकटाव के कारण हर साल मुनस्यारी के लिए यातायात बंद हो जाता है। कहा कि खनन की अनुमति देने से पहले इलाके में भूवैज्ञानिकों से सर्वे कराया जाना चाहिए। खनन की अनुमति देने के बजाए भूकटाव से सुरक्षा के उपाय करने की मांग की गई है। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने कहा है कि इस मामले में फिर से विचार किया जाएगा और सर्वे करने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।
शासन ने नौ नवंबर को जारी आदेश में भैंसखाल और रसियाबगड़ को भी खनन के लिए चिन्हित किया है। साथ ही इसके लिए निविदा आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भैंसखाल की ग्राम प्रधान चंद्रकला दानू, सरपंच द्रौपदी देवी, रसियाबगड़ की सरपंच तुलसी देवी ने जिलाधिकारी को पत्र देकर कहा है कि भूस्खलन की दृष्टि से अति संवेदनशील इस इलाके में खनन की अनुमति देना गलत है। कहा कि जिस स्थान को खनन के लिए चुना गया है, उसके पूर्व दिशा में हरड़िया नाला और पश्चिम दिशा में रातीगाड़ है।
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इन दोनों स्थानों पर जबर्दस्त भूकटाव होता है। थल-मुनस्यारी सड़क इसी क्षेत्र से होकर जाती है। भूकटाव के कारण हर साल मुनस्यारी के लिए यातायात बंद हो जाता है। कहा कि खनन की अनुमति देने से पहले इलाके में भूवैज्ञानिकों से सर्वे कराया जाना चाहिए। खनन की अनुमति देने के बजाए भूकटाव से सुरक्षा के उपाय करने की मांग की गई है। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने कहा है कि इस मामले में फिर से विचार किया जाएगा और सर्वे करने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।
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