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खोतिला में भूस्खलन के स्थायी उपचार में जुटे भूवैज्ञानिक

Sat, 18 Aug 2018 11:12 PM IST
Updated Sat, 18 Aug 2018 11:12 PM IST
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खोतिला में भूस्खलन के स्थायी उपचार में जुटे भूवैज्ञानिक
पिथौरागढ़। धारचूला के खोतिला में हो रहे भूस्खलन को रोकने के लिए भूवैज्ञानिकों की टीम जुट गई है। पिछले दो वर्षों से लगातार भारी भूस्खलन होने से काली नदी का प्रवाह नेपाल की ओर मुड़ गया है। नेपाल सरकार की ओर से इस पर आपत्ति जताते हुए भूस्खलन का जल्दी उपचार करने की मांग उठाई गई थी।
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भारत-नेपाल के बीच बहने वाली काली नदी के प्रवाह को बाधित करने वाले खोतिला भूस्खलन के स्थायी उपचार के लिए शासन की ओर से एक टीम गठित की गई। 17 अगस्त को नेपाल और भारत के भूवैज्ञानिकों ने काली नदी के तट पर स्थायी उपचार के लिए मंथन किया। खोतिला का भूस्खलन दो सितंबर 2016 को शुरू हुआ। 12 सितंबर को फिर से भारी भूस्खलन होने से काली नदी का प्रवाह नेपाल की ओर मुड़ गया।
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भूवैज्ञानिकों ने भूस्खलन की रोकथाम के कुछ सुझाव दिए। बाद में भूस्खलन क्षेत्र के नीचे काली नदी के किनारे पर सिंचाई विभाग की ओर से सुरक्षात्मक कार्य किए गए। साथ ही नदी की सफाई भी की गई। पिछले वर्ष फिर से भूस्खलन हुआ और काली नदी का प्रवाह नेपाल की ओर मुड़ गया। इस पर नेपाल सरकार ने भूस्खलन का उपचार जल्दी करने की मांग उठाई थी।
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टीम में जीएसआई देहरादून के निदेशक भूपेंद्र सिंह, भूवैज्ञानिक एम राजू कुमार, सीएम भट्ट, अधिशासी निदेशक आपदा प्रबंधन पीयूष रौतेला, उप सचिव राजेंद्र सिंह पतियाल, एसडीएम धारचूला राजकुमार पांडेय और नेपाल के अधिकारी शामिल हैं।

भूस्खलन के बने हैं तीन जोन
पिथौरागढ़। भूवैज्ञानिकों की टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि भूस्खलन जोन के तीन हिस्से बन चुके हैं। पहला हिस्सा काली नदी से जुड़ा है, इसमें भूवैज्ञानिकों ने राय दी है कि उसमें मानसून सत्र तक कोई छेड़छाड़ नहीं की जाए। यदि छेड़छाड़ की गई तो नदी का प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है। दूसरा हिस्सा मध्य स्थान पर है, यहां मौजूद बोल्डरों को टुकड़ों में कर भूस्खलन हिस्से के भार को कम किया जाएगा। साथ ही पहाड़ी पर पड़े दरारों को सीमेंट से भरना होगा। भूस्खलन का तीसरा हिस्सा टॉप की ओर है, उसमें भी सुरक्षात्मक कार्य किए जाएंगे और बरसाती पानी की निकासी भूस्खलन जोन से अलग ढलानों की ओर की जाएगी।


चट्टानों का गहन परीक्षण किया
पिथौरागढ़। भूवैज्ञानिक प्रदीप कुमार ने बताया कि टीम ने भारत-नेपाल की ओर स्थित भूस्खलन जोन ग्राम खोतिला में चट्टानों का गहन परीक्षण किया। भूस्खलन के कारण जानने के लिए डेटा एकत्र कर लिया गया है। बताया कि इसके विश्लेषण के बाद भूगर्भीय निरीक्षण की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी और भूस्खलन का स्थायी उपचार किया जाएगा।
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