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हवा में लटकी तीन दुकानें महाकाली में समाई
Updated Thu, 16 Aug 2018 10:53 PM IST
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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। वर्ष 2013 की आपदा में लटके एक आवासीय मकान सहित दो दुकानें बुधवार रात महाकाली नदी में समा गई। प्रशासन द्वारा पहले ही इन्हें खाली कराने से कोई जनहानि नहीं हुई।
वर्ष 2013 में उच्च हिमालयी क्षेत्र में भारी बारिश के बाद उफनाई महाकाली नदी ने काफी तबाही मचाई थी। झूलाघाट में दो दर्जन दुकानें और कुछ मकान नदी के कटाव के कारण हवा में लटक गई थी। बुधवार रात दीपक इजरवाल का मकान और दुकान, लक्ष्मण लाल श्रेष्ठ, सौरव श्रेष्ठ की दुकानें भी महाकाली नदी में समा गई। दुकानों के गिरने की सूचना व्यापार संघ अध्यक्ष संजीव जोशी ने क्षेत्र के पटवारी को दे दी है।
विधायक विशन सिंह चुफाल ने झूलाघाट का दौरा कर पीड़ितों को सरकार से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। राजस्व उपनिरीक्षक जीवन पुनेठा ने बताया 2013 में सभी पीड़ितों को राहत राशि बांटी जा चुकी है। क्षति का आकलन कर रिपोर्ट तहसील कार्यालय को उपलब्ध कराने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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सबसे ज्यादा पीड़ित दीपक का परिवार
झूलाघाट। आपदा के दौरान दुकान और उसी में रहने वाले दीपक इजरवाल को सबसे अधिक नुकसान हुआ था। नदी की ओर लटक चुकी पैतृक संपत्ति में परिवार के पांच सदस्यों के साथ रहने वाले दीपक को दुकान भी बंद करनी पड़ी। सरकार एवं प्रशासन ने पूर्ण क्षति के बाद ही विस्थापन और मुआवजा देने की बात कहकर टाल दिया। आपदा के पांच साल बाद मकान के गिरने से दीपक को मुआवजा मिलने की उम्मीद है।
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वर्ष 2013 में उच्च हिमालयी क्षेत्र में भारी बारिश के बाद उफनाई महाकाली नदी ने काफी तबाही मचाई थी। झूलाघाट में दो दर्जन दुकानें और कुछ मकान नदी के कटाव के कारण हवा में लटक गई थी। बुधवार रात दीपक इजरवाल का मकान और दुकान, लक्ष्मण लाल श्रेष्ठ, सौरव श्रेष्ठ की दुकानें भी महाकाली नदी में समा गई। दुकानों के गिरने की सूचना व्यापार संघ अध्यक्ष संजीव जोशी ने क्षेत्र के पटवारी को दे दी है।
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विधायक विशन सिंह चुफाल ने झूलाघाट का दौरा कर पीड़ितों को सरकार से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। राजस्व उपनिरीक्षक जीवन पुनेठा ने बताया 2013 में सभी पीड़ितों को राहत राशि बांटी जा चुकी है। क्षति का आकलन कर रिपोर्ट तहसील कार्यालय को उपलब्ध कराने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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सबसे ज्यादा पीड़ित दीपक का परिवार
झूलाघाट। आपदा के दौरान दुकान और उसी में रहने वाले दीपक इजरवाल को सबसे अधिक नुकसान हुआ था। नदी की ओर लटक चुकी पैतृक संपत्ति में परिवार के पांच सदस्यों के साथ रहने वाले दीपक को दुकान भी बंद करनी पड़ी। सरकार एवं प्रशासन ने पूर्ण क्षति के बाद ही विस्थापन और मुआवजा देने की बात कहकर टाल दिया। आपदा के पांच साल बाद मकान के गिरने से दीपक को मुआवजा मिलने की उम्मीद है।