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संवेदनशील गांवों की सूची में शामिल होंगे काली व रामगंगा नदी किनारे बसे 19 गांव
Updated Mon, 11 Jun 2018 10:45 PM IST
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पिथौरागढ़। काली और रामगंगा के किनारे बसे पिथौरागढ़ जिले के 19 गांवों संवेदनशील गांवों की सूची में शामिल होंगे। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से इन गांवों की सूची तैयार की जा रही है। इन गांवों के सूची में शामिल होने के बाद जिले में आपदा की दृष्टि से संवेदनशील गांवों की संख्या 62 से बढ़कर 91 हो जाएगी।
पिथौरागढ़ जिले में काली गंगा, रामगंगा, गोरी सहित तमाम हिम नदियों के किनारे कई गांवों बसे हैं। 2013 में आई भीषण आपदा से नदियों का जल स्तर बढ़ने से भू कटाव के कारण कई गांवों खतरे की जद में आ गए थे। यहां तक कि मंदाकिनी नदी ने मदकोट का भूगोल बदल दिया था। हर साल हो रहे कटाव से धारचूला के बलुवाकोट, जौलजीबी के साथ ही झूलाघाट कस्बा गंभीर खतरे में हैं। बरसात में नदियों के रौद्र रूप को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने नए सिरे से संवेदनशील गांवों की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है। इसके तहत जिले की रामगंगा और काली के किनारे बसे 19 गांवों एवं कस्बों को संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है। नए गांवों के चिन्हीकरण के बाद आपदा की दृष्टि से संवेदनशील गांवों की संख्या बढ़कर 91 हो जाएगी। बरसात में इन गांवों एवं कस्बों की आबादी को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के प्रयास किए जाएंगे।
एनएच सहित आधा दर्जन सड़कें संवेदनशील
पिथौरागढ़। बरसात में भूस्खलन के कारण मलबा आने से जनपद की सड़कों में यातायात प्रभावित होता है। एनएच सहित जनपद की आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण सड़कें आपदा की दृष्टि से संवेदनशील हैं। थल-मुनस्यारी, घाट-पिथौरागढ़, तवाघाट-पांगला, धारचूला-तवाघाट, तवाघाट-सोबला सहित कई सड़कों में मलबा आने का खतरा बना रहता है। यातायात लंबे समय तक प्रभावित न हो इसके लिए प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं पूरी कर दी हैं। सभी मार्गों में पर्याप्त कर्मी और जेसीबी तैनात रहेंगी।
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बरसात में नदियों का जल स्तर बढ़ने पर नदी किनारे बसे कई गांवों भी खतरे की जद में आ जाते हैं। इसको देखते हुए जिले की रामगंगा और काली किनारे बसे गांवों का चिन्हीकरण किया गया है। लगभग 19 गांव इसमें शामिल हैं। बरसात में अधिक खतरे वाले गांवों व कस्बों के परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जाएगी।
- आरएस राणा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, पिथौरागढ़।
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पिथौरागढ़ जिले में काली गंगा, रामगंगा, गोरी सहित तमाम हिम नदियों के किनारे कई गांवों बसे हैं। 2013 में आई भीषण आपदा से नदियों का जल स्तर बढ़ने से भू कटाव के कारण कई गांवों खतरे की जद में आ गए थे। यहां तक कि मंदाकिनी नदी ने मदकोट का भूगोल बदल दिया था। हर साल हो रहे कटाव से धारचूला के बलुवाकोट, जौलजीबी के साथ ही झूलाघाट कस्बा गंभीर खतरे में हैं। बरसात में नदियों के रौद्र रूप को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने नए सिरे से संवेदनशील गांवों की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है। इसके तहत जिले की रामगंगा और काली के किनारे बसे 19 गांवों एवं कस्बों को संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है। नए गांवों के चिन्हीकरण के बाद आपदा की दृष्टि से संवेदनशील गांवों की संख्या बढ़कर 91 हो जाएगी। बरसात में इन गांवों एवं कस्बों की आबादी को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के प्रयास किए जाएंगे।
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एनएच सहित आधा दर्जन सड़कें संवेदनशील
पिथौरागढ़। बरसात में भूस्खलन के कारण मलबा आने से जनपद की सड़कों में यातायात प्रभावित होता है। एनएच सहित जनपद की आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण सड़कें आपदा की दृष्टि से संवेदनशील हैं। थल-मुनस्यारी, घाट-पिथौरागढ़, तवाघाट-पांगला, धारचूला-तवाघाट, तवाघाट-सोबला सहित कई सड़कों में मलबा आने का खतरा बना रहता है। यातायात लंबे समय तक प्रभावित न हो इसके लिए प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं पूरी कर दी हैं। सभी मार्गों में पर्याप्त कर्मी और जेसीबी तैनात रहेंगी।
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बरसात में नदियों का जल स्तर बढ़ने पर नदी किनारे बसे कई गांवों भी खतरे की जद में आ जाते हैं। इसको देखते हुए जिले की रामगंगा और काली किनारे बसे गांवों का चिन्हीकरण किया गया है। लगभग 19 गांव इसमें शामिल हैं। बरसात में अधिक खतरे वाले गांवों व कस्बों के परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जाएगी।
- आरएस राणा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, पिथौरागढ़।