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गर्मी की दस्तक के साथ ही पेयजल योजनाओं पर बढ़ा दबाव
Updated Tue, 13 Mar 2018 10:04 PM IST
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पिथौरागढ़। गर्मी की दस्तक के साथ ही पिथौरागढ़ में पेयजल समस्या गहराने के आसार बढ़ गए हैं। पहले से ही मांग की तुलना में आधा पानी मिल पा रहा है। अब गर्मी में बढ़ती मांग का दबाव पैदा हो गया है। नगर के साथ ही इससे सटे ग्रामीण इलाकों में स्रोतों का पानी कम होने से संकट गहरा रहा है। रोजाना मांग की तुलना में आपूर्ति घटती जा रही है।
अभी गर्मी शुरू नहीं हुई कि पानी की समस्या ने सिर उठाना शुरू कर दिया है। वैसे पिथौरागढ़ नगर को रोजाना 12 एमएलडी पानी की दरकार है। सामान्य दिनों में ठुलीगाड़, घाट और रई योजना से बमुश्किल छह एमएलडी पानी मिल रहा है। अब पारा चढ़ते ही नगर में पानी की मांग और बढ़ने लगी है। यही हाल पिथौरागढ़ से सटे ग्रामीण इलाकों का भी है। इन इलाकों की सैकड़ों छोटी पेयजल योजनाएं सामान्य दिनों में भी जरूरत भर आपूर्ति नहीं कर पा रही है।
पारा चढ़ते ही स्रोतों का पानी कम हो रहा है। ग्रामीण इलाकों में भी रोजाना मांग की तुलना में आधा पानी ही मिल पा रहा है। यहां रोजाना पांच एमएलडी पानी की जरूरत है। जल संस्थान को अभी से जरूरत का पानी मुहैया कराना मुश्किल साबित हो रहा है। रोजाना मांग और उपलब्धता का अंतर बढ़ता जा रहा है।
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मानक का आधा मिल रहा पानी
नगरी आबादी के मानक के अनुसार प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी की खपत है, लेकिन नगरीय आबादी को रोजाना महज 72 लीटर पानी ही मुहैया हो पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजाना न्यूनतम 90 लीटर प्रति व्यक्ति की मांग है, जबकि योजनाओं से मांग का आधा ही पानी मिल रहा है।
नगर में पेयजल समस्या वाले इलाके
डिग्री कॉलेज, सरस्वती विहार, पांडेगांव, विण, जगदंबा कॉलोनी, चोरसुला, टकाना, लिंक रोड, लिंठ्यूड़ा, रई, भदेलवाड़ा, धर्मशाला लाइन, चंद्रभागा क्षेत्र।
नगर से सटे समस्याग्रस्त ग्रामीण इलाके
छेड़ा पश्चिम, धनौड़ा, चंडाक, ऐंचोली, धारी धमौड़, दिगरा मुवानी, बनकोट, नैनीपातल, जाजरदेवल, पंडा, दौली ग्राम समूह, पलेटा, बगौर गलात, आडूखोली।
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अभी गर्मी शुरू नहीं हुई कि पानी की समस्या ने सिर उठाना शुरू कर दिया है। वैसे पिथौरागढ़ नगर को रोजाना 12 एमएलडी पानी की दरकार है। सामान्य दिनों में ठुलीगाड़, घाट और रई योजना से बमुश्किल छह एमएलडी पानी मिल रहा है। अब पारा चढ़ते ही नगर में पानी की मांग और बढ़ने लगी है। यही हाल पिथौरागढ़ से सटे ग्रामीण इलाकों का भी है। इन इलाकों की सैकड़ों छोटी पेयजल योजनाएं सामान्य दिनों में भी जरूरत भर आपूर्ति नहीं कर पा रही है।
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पारा चढ़ते ही स्रोतों का पानी कम हो रहा है। ग्रामीण इलाकों में भी रोजाना मांग की तुलना में आधा पानी ही मिल पा रहा है। यहां रोजाना पांच एमएलडी पानी की जरूरत है। जल संस्थान को अभी से जरूरत का पानी मुहैया कराना मुश्किल साबित हो रहा है। रोजाना मांग और उपलब्धता का अंतर बढ़ता जा रहा है।
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मानक का आधा मिल रहा पानी
नगरी आबादी के मानक के अनुसार प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी की खपत है, लेकिन नगरीय आबादी को रोजाना महज 72 लीटर पानी ही मुहैया हो पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजाना न्यूनतम 90 लीटर प्रति व्यक्ति की मांग है, जबकि योजनाओं से मांग का आधा ही पानी मिल रहा है।
नगर में पेयजल समस्या वाले इलाके
डिग्री कॉलेज, सरस्वती विहार, पांडेगांव, विण, जगदंबा कॉलोनी, चोरसुला, टकाना, लिंक रोड, लिंठ्यूड़ा, रई, भदेलवाड़ा, धर्मशाला लाइन, चंद्रभागा क्षेत्र।
नगर से सटे समस्याग्रस्त ग्रामीण इलाके
छेड़ा पश्चिम, धनौड़ा, चंडाक, ऐंचोली, धारी धमौड़, दिगरा मुवानी, बनकोट, नैनीपातल, जाजरदेवल, पंडा, दौली ग्राम समूह, पलेटा, बगौर गलात, आडूखोली।