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स्वच्छता अभियान का एक पहलू यह भी
Updated Thu, 28 Sep 2017 11:04 PM IST
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थल (पिथौरागढ़)। स्वच्छ भारत अभियान का हल्ला पूरे देश में सिर चढ़कर बोल रहा है, लेकिन यहां तो सैकड़ों लोग खुले में शौच कर रामगंगा को गंदा करने में तुले हैं। एक ओर दावा किया जाता है कि पूरा जिला खुले में शौच की प्रथा से मुक्त हो चुका है, लेकिन थल में इस हकीकत को देखकर तो ऐसा लगता है कि खुले में शौच की प्रथा समाप्त नहीं हो पाई है। बाहरी इलाकों से यहां आने वाले सैकड़ों मजदूर एवं अन्य काम के लिए आने वाले लोग छोटे-छोटे कमरों में समूह बनाकर रहते हैं और शौच के लिए उनको नदी का किनारा मिलता है।
थल में कोई सीवर लाइन नहीं है। सफाई व्यवस्था देखने के लिए यहां नगर पंचायत भी नहीं है। लोग जहां मन आया, वहां पर गंदगी कर देते हैं। इस गंदगी का व्यापक असर इस तरह हो रहा है कि सारी गंदगी नदी में मिल रही है और नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि कस्बे में सार्वजनिक शौचालय नहीं है और नगर पंचायत का गठन अब तक नहीं हो पाया है।
बाजार में सफाई अभियान के नाम पर कभी-कभार झाड़ू जरूर लग जाता है, लेकिन जो गंदगी बीमारी को फैलाने का कारण बन रही है, उसके समाधान की किसी को चिंता नहीं है। तहसीलदार रघुवीर सिंह ने बताया कि लोगों को सफाई को प्रति जागरूक किया जाएगा। साथ ही इस तरह की समस्या का समाधान निकाला जाएगा।
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कस्बे में सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएं
ग्राम प्रधान महिराज भैंसोड़ा का कहना है कि सबसे पहले सार्वजनिक शौचालय बनाया जाए और सीवर लाइन की व्यवस्था की जाए। यदि बाहर से आने वाले मजदूरों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं होगी तो वह मजबूरी में कोई रास्ता तो ढूंढेंगे ही। उन्होंने कहा कि कस्बे में कम से कम चार सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएं, तभी इस समस्या का समाधान होगा।
नगर पंचायत का गठन की एकमात्र समाधान
स्थानीय निवासी नीमा चंद का कहना है कि लोग लंबे समय से नगर पंचायत के गठन की मांग कर रहे हैं। नगर पंचायत बनने पर कुछ सफाई कर्मचारी मिल जाते और कस्बा एक व्यवस्था में आ जाता। इस समय यहां पर न तो सफाई के प्रति कोई चेतना है और न गंदगी करने वालों को रोकने वाला कोई है। ऐसे में यह समस्या लगातार बढ़ती जाएगी।
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थल में कोई सीवर लाइन नहीं है। सफाई व्यवस्था देखने के लिए यहां नगर पंचायत भी नहीं है। लोग जहां मन आया, वहां पर गंदगी कर देते हैं। इस गंदगी का व्यापक असर इस तरह हो रहा है कि सारी गंदगी नदी में मिल रही है और नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि कस्बे में सार्वजनिक शौचालय नहीं है और नगर पंचायत का गठन अब तक नहीं हो पाया है।
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बाजार में सफाई अभियान के नाम पर कभी-कभार झाड़ू जरूर लग जाता है, लेकिन जो गंदगी बीमारी को फैलाने का कारण बन रही है, उसके समाधान की किसी को चिंता नहीं है। तहसीलदार रघुवीर सिंह ने बताया कि लोगों को सफाई को प्रति जागरूक किया जाएगा। साथ ही इस तरह की समस्या का समाधान निकाला जाएगा।
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कस्बे में सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएं
ग्राम प्रधान महिराज भैंसोड़ा का कहना है कि सबसे पहले सार्वजनिक शौचालय बनाया जाए और सीवर लाइन की व्यवस्था की जाए। यदि बाहर से आने वाले मजदूरों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं होगी तो वह मजबूरी में कोई रास्ता तो ढूंढेंगे ही। उन्होंने कहा कि कस्बे में कम से कम चार सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएं, तभी इस समस्या का समाधान होगा।
नगर पंचायत का गठन की एकमात्र समाधान
स्थानीय निवासी नीमा चंद का कहना है कि लोग लंबे समय से नगर पंचायत के गठन की मांग कर रहे हैं। नगर पंचायत बनने पर कुछ सफाई कर्मचारी मिल जाते और कस्बा एक व्यवस्था में आ जाता। इस समय यहां पर न तो सफाई के प्रति कोई चेतना है और न गंदगी करने वालों को रोकने वाला कोई है। ऐसे में यह समस्या लगातार बढ़ती जाएगी।