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गायिका कबूतरी देवी ने सरकार से जमीन मांगी
Updated Thu, 06 Jul 2017 11:03 PM IST
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पिथौरागढ़। आज पनि जाउं-जाउं भोल पनि जाउं-जाउं पोरखिन त लैई जूलो, स्टेशन सम मा पुजा दे मलाई पछिल बिराना है जूंला गीत में अपनी खनकती आवाज से लोगों का मन मोहने वाली प्रख्यात लोक गायिका कबूतरी देवी को मकान बनाने के लिए सरकार से जमीन नहीं मिल पा रही है। उत्तराखंड की इस गायिका ने पिथौरागढ़ नगर के आसपास मकान बनाने के लिए जमीन आवंटित करने को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र भेजा है।
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में 77 वर्षीय गायिका कबूतरी देवी ने लिखा है कि विवाह के बाद वह क्वीतड़ गांव (पिथौरागढ़) आ गईं। वर्ष 1984 में उनके पति दीवानी राम का निधन हो गया। उनका परिवार भूमिहीन है। मजदूरी, गायन, वादन कर जीवन यापन किया। उसी से तीन बच्चों का पालनपोषण किया। संघर्ष के बूते एक लोक गायिका की पहचान मिली। लिखा है कि बड़ी बेटी मंजू अपने परिवार के साथ खटीमा में रहती है। बेटा भुवन अपने बच्चों के साथ मुंबई में रहता है। छोटी बेटी हेमंती पिथौैरागढ़ के सेरी कुम्डार गांव में रहती है। काफी समय से हेमंती ही उनकी देखरेख कर रही हैं। हेमंती पर अपने परिवार की जिम्मेदारी है, छोटा सा घर होने के कारण हेमंती की स्थिति उन्हें साथ रखने की नहीं है।
लिखा है कि उत्तराखंड सरकार से एक कलाकार के रूप में उन्हें पेंशन मिलती है। वह पिछले 12 साल से बीमार हैं। प्रशंसकों, शुभचिंतकों के प्रयासों से इलाज होता रहा है। प्रदेश सरकार ने भी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज कराया था। वर्तमान में उनका स्वास्थ्य बेहद खराब है। वह क्वीतड़ गांव में रहने की स्थिति में नहीं हैं। सरकार पिथौरागढ़, वड्डा अथवा सेरी कुम्डार के आसपास छोटा सा जमीन का टुकड़ा देकर मकान बनाने में मदद करे तो वह अपनी बेटी के साथ जिला अस्पताल के पास आ जाती।
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मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में 77 वर्षीय गायिका कबूतरी देवी ने लिखा है कि विवाह के बाद वह क्वीतड़ गांव (पिथौरागढ़) आ गईं। वर्ष 1984 में उनके पति दीवानी राम का निधन हो गया। उनका परिवार भूमिहीन है। मजदूरी, गायन, वादन कर जीवन यापन किया। उसी से तीन बच्चों का पालनपोषण किया। संघर्ष के बूते एक लोक गायिका की पहचान मिली। लिखा है कि बड़ी बेटी मंजू अपने परिवार के साथ खटीमा में रहती है। बेटा भुवन अपने बच्चों के साथ मुंबई में रहता है। छोटी बेटी हेमंती पिथौैरागढ़ के सेरी कुम्डार गांव में रहती है। काफी समय से हेमंती ही उनकी देखरेख कर रही हैं। हेमंती पर अपने परिवार की जिम्मेदारी है, छोटा सा घर होने के कारण हेमंती की स्थिति उन्हें साथ रखने की नहीं है।
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लिखा है कि उत्तराखंड सरकार से एक कलाकार के रूप में उन्हें पेंशन मिलती है। वह पिछले 12 साल से बीमार हैं। प्रशंसकों, शुभचिंतकों के प्रयासों से इलाज होता रहा है। प्रदेश सरकार ने भी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज कराया था। वर्तमान में उनका स्वास्थ्य बेहद खराब है। वह क्वीतड़ गांव में रहने की स्थिति में नहीं हैं। सरकार पिथौरागढ़, वड्डा अथवा सेरी कुम्डार के आसपास छोटा सा जमीन का टुकड़ा देकर मकान बनाने में मदद करे तो वह अपनी बेटी के साथ जिला अस्पताल के पास आ जाती।
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