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मुवानी में शीघ्र विकसित होगा कृषि पारिस्थितिकीय पर्यटन
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पिथौरागढ़। यदि वन विभाग की कवायद रंग लाई तो कनालीछीना विकास खंड के रामगंगा नदी के किनारे बसा मुवानी कस्बा शीघ्र कृषि पारिस्थिकीय पर्यटन गतिविधियों के रूप में विकसित होगा। रेशम फार्म में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 80 लाख रुपये की कार्य योजना तैयार कर उत्तराखंड टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड को भेजा जा रहा है। मुवानी को मुनस्यारी के ईको पर्यटन से जोड़ा जाएगा।
दरअसल पिथौरागढ़ जिले में आने वाला पर्यटक चौकोड़ी और मुनस्यारी तक ही सीमित हो जाता है। इससे इन जगहों पर तो भीड़ लग जाती है, लेकिन अन्य जगहों पर पर्यटन गतिविधियों का कोई लाभ नहीं मिल पाता है। प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. विनय भार्गव ने बताया कि रामगंगा नदी के किनारे बसा मुवानी कस्बा रमणीक तो है ही, जैविक कृषि उत्पादन का भी क्षेत्र है।
क्षेत्र में राजकीय रेशम विभाग द्वारा वर्तमान में दो एकड़ में रेशम फार्म विकसित किया जा रहा है। क्षेत्र की जैव विविधता, पक्षियों की प्रचुरता, रामगंगा नदी के जलागम क्षेत्र लेकघाटी में साल, पर्णपाती वन प्रचुर मात्रा में हैं। कमतोली के आसपास बाघ भी देखा जाता है। लेकघाटी में लोनिवि की ओर से निर्मित गैंग हट भी उपलब्ध है। इसे ग्रामीण कृषि पारिस्थितिकीय पर्यटकों की सुविधा के लिए भी उपयोग में लाया जा सकता है। इस संबंध में स्थानीय लोगों से अधिकारियों की बैठक हुई है। ग्रामीणों को होम स्टे और युवाओं को नेचर गाइड का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वन विभाग की योजना है कि मुवानी क्षेत्र में प्रस्तावित कृषि पारिस्थितिकीय पर्यटन गतिविधियों को मुनस्यारी ईको पार्क में की जाने वाली पारिस्थितिकीय पर्यटन गतिविधियों से सीधा जोड़ा जा सकता है।फोटो 15 पीटीएच 06 पी
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दरअसल पिथौरागढ़ जिले में आने वाला पर्यटक चौकोड़ी और मुनस्यारी तक ही सीमित हो जाता है। इससे इन जगहों पर तो भीड़ लग जाती है, लेकिन अन्य जगहों पर पर्यटन गतिविधियों का कोई लाभ नहीं मिल पाता है। प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. विनय भार्गव ने बताया कि रामगंगा नदी के किनारे बसा मुवानी कस्बा रमणीक तो है ही, जैविक कृषि उत्पादन का भी क्षेत्र है।
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क्षेत्र में राजकीय रेशम विभाग द्वारा वर्तमान में दो एकड़ में रेशम फार्म विकसित किया जा रहा है। क्षेत्र की जैव विविधता, पक्षियों की प्रचुरता, रामगंगा नदी के जलागम क्षेत्र लेकघाटी में साल, पर्णपाती वन प्रचुर मात्रा में हैं। कमतोली के आसपास बाघ भी देखा जाता है। लेकघाटी में लोनिवि की ओर से निर्मित गैंग हट भी उपलब्ध है। इसे ग्रामीण कृषि पारिस्थितिकीय पर्यटकों की सुविधा के लिए भी उपयोग में लाया जा सकता है। इस संबंध में स्थानीय लोगों से अधिकारियों की बैठक हुई है। ग्रामीणों को होम स्टे और युवाओं को नेचर गाइड का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वन विभाग की योजना है कि मुवानी क्षेत्र में प्रस्तावित कृषि पारिस्थितिकीय पर्यटन गतिविधियों को मुनस्यारी ईको पार्क में की जाने वाली पारिस्थितिकीय पर्यटन गतिविधियों से सीधा जोड़ा जा सकता है।फोटो 15 पीटीएच 06 पी
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