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अस्कोट के गांवों में जंगली सुअरों का आतंक
Updated Sat, 15 Dec 2018 11:00 PM IST
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। अस्कोट के कई गांवों में जंगली सुअरों ने आतंक मचा रखा है। खोलियागांव के प्रधान किशन राम, रसगाड़ी की प्रधान उमा बिष्ट ने बताया कि खोलियागांव, देवल, धौलाकोट, कभड़िया, बैड़ा, मचौरा समेत कई गांवों में सुअर जबरदस्त नुकसान पहुंचा रहे हैं।
शाम होते ही सुअर खेतों में आ जाते हैं। झुंड के रूप में आ रहे सुअर खेती को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहे, खेतों को भी बर्बाद कर रहे हैं। प्रधानों ने कहा कि सुअरों के आतंक के कारण लोगों ने खेती करनी तक छोड़ दी है। ग्राम प्रधानों ने वन विभाग से जंगली सुअरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।
बता दें कि सरकार ने सुअरों को हिंसक जीव की श्रेणी में शामिल करते हुए वन विभाग की निगरानी में सुअरों को मारने का नियम बनाया है, लेकिन जागरूकता के अभाव में ग्रामीण इस नियम का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इसके लिए वन रेंजर को प्रार्थना पत्र प्रेषित करना होता है। वन विभाग औपचारिकता पूरी कर क्षेत्र के नामित शिकारी को वन कर्मियों की मौजूदगी में सुअर को मारने की अनुमति देता है। मारे गए सुअर के शरीर को वन विभाग की मौजूदगी में दफनाने का नियम है।
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शाम होते ही सुअर खेतों में आ जाते हैं। झुंड के रूप में आ रहे सुअर खेती को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहे, खेतों को भी बर्बाद कर रहे हैं। प्रधानों ने कहा कि सुअरों के आतंक के कारण लोगों ने खेती करनी तक छोड़ दी है। ग्राम प्रधानों ने वन विभाग से जंगली सुअरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।
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बता दें कि सरकार ने सुअरों को हिंसक जीव की श्रेणी में शामिल करते हुए वन विभाग की निगरानी में सुअरों को मारने का नियम बनाया है, लेकिन जागरूकता के अभाव में ग्रामीण इस नियम का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इसके लिए वन रेंजर को प्रार्थना पत्र प्रेषित करना होता है। वन विभाग औपचारिकता पूरी कर क्षेत्र के नामित शिकारी को वन कर्मियों की मौजूदगी में सुअर को मारने की अनुमति देता है। मारे गए सुअर के शरीर को वन विभाग की मौजूदगी में दफनाने का नियम है।
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