{"_id":"5bcb6a87bdec22696633557e","slug":"151540057735-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज शाम तक नजंग पुल से चलने लगेंगे घोड़े-खच्चर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज शाम तक नजंग पुल से चलने लगेंगे घोड़े-खच्चर
Updated Sat, 20 Oct 2018 11:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धारचूला (पिथौरागढ़)। भारत-नेपाल को जोड़ने वाला नजंग पुल रविवार तक बनकर तैयार हो जाएगा। इस पुल से रविवार की शाम तक घोड़े-खच्चरों की आवाजाही भी शुरू होने की उम्मीद है।
माइग्रेशन में व्यास घाटी के बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, नावि, रांगकांग, कुटी गए ग्रामीणों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रशासन नजंग में तेजी से पुल निर्माण करा रहा है। महाकाली नदी पर बन रहे इस पुल से माइग्रेशन पर गए लोग पहले नेपाल जाएंगे, इसके बाद लखनपुर में भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करेंगे।
सूचना के अनुसार जिन ग्रामीणों के पास घोड़े खच्चर और भेड़ें नहीं हैं, उनका लौटना शुरू हो गया है, जबकि जानवरों के साथ गए ग्रामीण 25 अक्तूबर से लौटना शुरू करेंगे। बताया जा रहा है कि इन गांवों में अब भी एक हजार से अधिक ग्रामीण हैं। एसडीएम आरके पांडेय ने शनिवार को भी महाकाली नदी में बन रहे पुल का निरीक्षण किया।
विज्ञापन
सभी गांवों में बंट चुका है खाद्यान्न
धारचूला। उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में हेलीकॉप्टर से भेजा गया पूरा खाद्यान्न बंट चुका है। आबादी के हिसाब से राशन एवं अन्य जरूरी सामान नहीं भेजने से अधिकतर परिवारों को राशन नहीं मिला है। कुछ परिवारों के पास सीमित मात्रा में राशन एवं अन्य साग्रमी है। ऐसे में यदि जल्दी राशन नहीं भेजा गया तो पशुओं के साथ गांवों में मौजूद ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ सकती है। हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र बुदियाल ने प्रशासन से हेलीकॉप्टर से और रसद शीघ्र भेजने की मांग की है।
विज्ञापन
माइग्रेशन में व्यास घाटी के बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, नावि, रांगकांग, कुटी गए ग्रामीणों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रशासन नजंग में तेजी से पुल निर्माण करा रहा है। महाकाली नदी पर बन रहे इस पुल से माइग्रेशन पर गए लोग पहले नेपाल जाएंगे, इसके बाद लखनपुर में भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करेंगे।
विज्ञापन
सूचना के अनुसार जिन ग्रामीणों के पास घोड़े खच्चर और भेड़ें नहीं हैं, उनका लौटना शुरू हो गया है, जबकि जानवरों के साथ गए ग्रामीण 25 अक्तूबर से लौटना शुरू करेंगे। बताया जा रहा है कि इन गांवों में अब भी एक हजार से अधिक ग्रामीण हैं। एसडीएम आरके पांडेय ने शनिवार को भी महाकाली नदी में बन रहे पुल का निरीक्षण किया।
विज्ञापन
सभी गांवों में बंट चुका है खाद्यान्न
धारचूला। उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में हेलीकॉप्टर से भेजा गया पूरा खाद्यान्न बंट चुका है। आबादी के हिसाब से राशन एवं अन्य जरूरी सामान नहीं भेजने से अधिकतर परिवारों को राशन नहीं मिला है। कुछ परिवारों के पास सीमित मात्रा में राशन एवं अन्य साग्रमी है। ऐसे में यदि जल्दी राशन नहीं भेजा गया तो पशुओं के साथ गांवों में मौजूद ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ सकती है। हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र बुदियाल ने प्रशासन से हेलीकॉप्टर से और रसद शीघ्र भेजने की मांग की है।