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तड़ीगांव में बीएडीपी के तहत नहीं हुआ एक भी काम
Updated Tue, 19 Jun 2018 11:44 PM IST
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झूलाघाट (पिथौरागढ़) नेपाल सीमा के महाकाली के किनारे अंतिम तड़ीगांव के लोगों ने सरकार और जनप्रतिधियों पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया है। क्षेत्र में बीएडीपी का जीरो मानक होने के बावजूद कोई भी विकास कार्य नहीं हुआ है। साथ ही इस योजना में क्षेत्र के जनप्रतिनियों द्वारा अपने चहेतों को काम दिलाकर सुविधायुक्त जोन में काम कराए जाने के आरोप लग रहे हैं।
पिथौरागढ़ विधानसभा और मूनकोट विकासखंड का तड़ीगांव सड़क से 12 किमी दूर स्थित है। यह गांव बार्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के जीरो मानक में आता है। पंचेश्वर नदी घाटी संघर्ष समिति के महामंत्री भूपेंद्र चंद ने कहा कि देश को आजाद हुए 67 साल हो चुके हैं। अभी तक बनी सरकारों या उनके जनप्रतिधियों ने यहां के विकास के लिए कोई कदम नहीं उठाया। अब पंचेश्वर बांध बनाकर गांव के लोगों को उनके घर और जमीन से बेघर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों का पलायन का मुख्य कारण भी जनप्रतिनिधियों द्वारा क्षेत्र के साथ किया जा रहा सौतेला व्यवहार है। उन्होंने सरकार को चेताया कि सीमांत के गांवों की यदि इसी तरह से अनदेखी होती रही तो कुछ ही वर्षों में गांव खाली हो जाएगा।
पिथौरागढ़ विधानसभा और मूनकोट विकासखंड का तड़ीगांव सड़क से 12 किमी दूर स्थित है। यह गांव बार्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के जीरो मानक में आता है। पंचेश्वर नदी घाटी संघर्ष समिति के महामंत्री भूपेंद्र चंद ने कहा कि देश को आजाद हुए 67 साल हो चुके हैं। अभी तक बनी सरकारों या उनके जनप्रतिधियों ने यहां के विकास के लिए कोई कदम नहीं उठाया। अब पंचेश्वर बांध बनाकर गांव के लोगों को उनके घर और जमीन से बेघर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों का पलायन का मुख्य कारण भी जनप्रतिनिधियों द्वारा क्षेत्र के साथ किया जा रहा सौतेला व्यवहार है। उन्होंने सरकार को चेताया कि सीमांत के गांवों की यदि इसी तरह से अनदेखी होती रही तो कुछ ही वर्षों में गांव खाली हो जाएगा।
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