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गोरी में भोजन की तलाश में पहुंचे गूसैंडर पक्षी
Updated Fri, 09 Feb 2018 10:52 PM IST
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पिथौरागढ़। मूल रूप से लद्दाख के बर्फीले पहाड़ियों पर मिलने वाले गूसैंडर पक्षियों का झुंड इस बार भी जौलजीबी से लेकर मदकोट तक गोरी में भोजन की तलाश में पहुंच चुका है। पक्षियों का यह झुंड नदी से मछलियों, मेंढकों का शिकार करता है और कभी-कभी वह छोटे पक्षियों को भी मारकर खाते हैं। मोनाल संस्था के मुख्य पक्षी विशेषज्ञ सुरेंद्र पंवार, बृजेश धर्मशक्तू और पुष्कर आर्य ने गोरी में बंगापानी, मदकोट, सेरा में इन पक्षियों के झुंड को नदी में शिकार करते देखा।
पिछले वर्षों से भी गूसैंडर पक्षी इस इलाके में आते रहे हैं। मोनाल संस्था के पक्षी विशेषज्ञों ने गूसैंडर के व्यवहार और गतिविधि के बारे में कई जानकारियां हासिल की हैं। नर पक्षी के सिर का रंग गहरा हरा होगा है, जबकि मादा पक्षी के सिर का रंग भूरा होता है। नर गूसैंडर की लंबाई 60 से 70 सेंटीमीटर तक होती है।
उसका वजन 1300 से 2100 ग्राम तक होता है। मादा की लंबाई करीब इतनी ही होती है, लेकिन वजन 900 ग्राम से 1500 ग्राम तक रहता है। मुख्य पक्षी विशेषज्ञ पंवार ने बताया कि गूसैंडर को कॉमन मैर्गन्सर नाम से भी जाना जाता है। गोरी में यह पक्षी दिसंबर से नजर आने लगते हैं और फरवरी के अंत में इनकी वापसी हो जाती है। उन्होंने बताया कि लद्दाख की पहाड़ियों पर यह पक्षी काफी संख्या में दिखते हैं।
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उन्होंने बताया कि यह प्रवासी पक्षी है। जाड़ों के मौसम में ही इसकी गतिविधियां नजर आती हैं। गर्मियों का मौसम इस पक्षी के लिए अनुकूल नहीं रहता। मोनाल संस्था ने इन पक्षियों पर एक किताब तैयार करने का भी फैसला लिया है, ताकि आम लोग भी इन पक्षियों के बारे में जानकारी हासिल कर सकें। मोनाल संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रवासी पक्षी उन स्थानों पर ही दोबारा जाते हैं, जहां पर उनको अनुकूल माहौल मिल जाए। गूसैंडर का गोरी नदी में पाया जाना एक अच्छा संकेत है। अगली बार शीतकाल में इन पक्षियों के बारे में और जानकारी हासिल की जाएगी।
पक्षी के लिए खतरे भी कम नहीं
प्रवासी पक्षी गूसैंडर के लिए खतरे भी कम नहीं हैं। शिकारी इन पक्षियों को भी निशाना बनाते हैं। नदी में हल्की उड़ान भरने वाले इन पक्षियों का शिकार बेहद आसान है। वन विभाग ने प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। इस क्षेत्र में मोनाल और अन्य पक्षी भी अक्सर शिकारियों का निशाना बनते रहते हैं।
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पिछले वर्षों से भी गूसैंडर पक्षी इस इलाके में आते रहे हैं। मोनाल संस्था के पक्षी विशेषज्ञों ने गूसैंडर के व्यवहार और गतिविधि के बारे में कई जानकारियां हासिल की हैं। नर पक्षी के सिर का रंग गहरा हरा होगा है, जबकि मादा पक्षी के सिर का रंग भूरा होता है। नर गूसैंडर की लंबाई 60 से 70 सेंटीमीटर तक होती है।
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उसका वजन 1300 से 2100 ग्राम तक होता है। मादा की लंबाई करीब इतनी ही होती है, लेकिन वजन 900 ग्राम से 1500 ग्राम तक रहता है। मुख्य पक्षी विशेषज्ञ पंवार ने बताया कि गूसैंडर को कॉमन मैर्गन्सर नाम से भी जाना जाता है। गोरी में यह पक्षी दिसंबर से नजर आने लगते हैं और फरवरी के अंत में इनकी वापसी हो जाती है। उन्होंने बताया कि लद्दाख की पहाड़ियों पर यह पक्षी काफी संख्या में दिखते हैं।
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उन्होंने बताया कि यह प्रवासी पक्षी है। जाड़ों के मौसम में ही इसकी गतिविधियां नजर आती हैं। गर्मियों का मौसम इस पक्षी के लिए अनुकूल नहीं रहता। मोनाल संस्था ने इन पक्षियों पर एक किताब तैयार करने का भी फैसला लिया है, ताकि आम लोग भी इन पक्षियों के बारे में जानकारी हासिल कर सकें। मोनाल संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रवासी पक्षी उन स्थानों पर ही दोबारा जाते हैं, जहां पर उनको अनुकूल माहौल मिल जाए। गूसैंडर का गोरी नदी में पाया जाना एक अच्छा संकेत है। अगली बार शीतकाल में इन पक्षियों के बारे में और जानकारी हासिल की जाएगी।
पक्षी के लिए खतरे भी कम नहीं
प्रवासी पक्षी गूसैंडर के लिए खतरे भी कम नहीं हैं। शिकारी इन पक्षियों को भी निशाना बनाते हैं। नदी में हल्की उड़ान भरने वाले इन पक्षियों का शिकार बेहद आसान है। वन विभाग ने प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। इस क्षेत्र में मोनाल और अन्य पक्षी भी अक्सर शिकारियों का निशाना बनते रहते हैं।