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कनार के आपदा प्रभावितों को 22 दिन बाद भी नहीं मिली मदद
Updated Mon, 23 Jul 2018 11:04 PM IST
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पिथौरागढ़। एक-दो जुलाई की आपदा के बाद से बंगापानी तहसील के कनार गांव के लोग अलग-थलग पड़ गए हैं। पहाड़ी दरकने से सात मकान खतरे की जद में आ गए हैं। प्रभावितों को 22 दिन बाद भी सरकार की ओर से कोई राहत नहीं मिली है। इस कारण कनार के लोग परेशान तो हैं ही, लोगों में व्यवस्था के खिलाफ रोष भी है।
कनार गांव 2007 से आपदा का दंश झेल रहा है। एक जुलाई की रात को कनार की पहाड़ी दरकने से मदन सिंह, राजेंद्र सिंह, गंभीर सिंह, पुष्कर सिंह, दीवान सिंह, मोहन सिंह, चंद्र सिंह के मकानों में मलबा घुस गया। कई मकानों में दरार आ गई। मकान रहने लायक नहीं रह गए। कनारी निवासी जगदीश सिंह परिहार का कहना है कि गांव के सात परिवार दो जुलाई से अपने रिश्तेदारों के वहां रह रहे हैं। पालतू जानवर अब भी खतरे में आए मकानों में ही हैं। प्रभावित लोग दिन में जानवरों को चारा, पानी देने के लिए खतरे की जद में आए मकानों में जा रहे हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि आपदा के बाद राजस्व टीम गांव में आई थी, टैंट और अन्य सहायता देने का भरोसा दिलाया गया था लेकिन आज तक प्रभावितों को कुछ नहीं मिला। उन लोगों को रिश्तेदारों के वहां अधिक दिन रहने में दिक्कत महसूस हो रही है। गांव के जगत सिंह ने इस संबंध में धारचूला के एसडीएम को भी पत्र भेजा है। प्रभावितों की मदद की गुहार लगाई है। सुरक्षित स्थान में बसाने की मांग की है।
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कनार गांव 2007 से आपदा का दंश झेल रहा है। एक जुलाई की रात को कनार की पहाड़ी दरकने से मदन सिंह, राजेंद्र सिंह, गंभीर सिंह, पुष्कर सिंह, दीवान सिंह, मोहन सिंह, चंद्र सिंह के मकानों में मलबा घुस गया। कई मकानों में दरार आ गई। मकान रहने लायक नहीं रह गए। कनारी निवासी जगदीश सिंह परिहार का कहना है कि गांव के सात परिवार दो जुलाई से अपने रिश्तेदारों के वहां रह रहे हैं। पालतू जानवर अब भी खतरे में आए मकानों में ही हैं। प्रभावित लोग दिन में जानवरों को चारा, पानी देने के लिए खतरे की जद में आए मकानों में जा रहे हैं।
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गांव के लोगों का कहना है कि आपदा के बाद राजस्व टीम गांव में आई थी, टैंट और अन्य सहायता देने का भरोसा दिलाया गया था लेकिन आज तक प्रभावितों को कुछ नहीं मिला। उन लोगों को रिश्तेदारों के वहां अधिक दिन रहने में दिक्कत महसूस हो रही है। गांव के जगत सिंह ने इस संबंध में धारचूला के एसडीएम को भी पत्र भेजा है। प्रभावितों की मदद की गुहार लगाई है। सुरक्षित स्थान में बसाने की मांग की है।
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