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पंचेश्वर बांध बनने से प्रभावित होंगी व्यापारिक गतिविधियां
Updated Sat, 02 Sep 2017 10:48 PM IST
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पिथौरागढ़। पंचेश्वर बांध का विरोध कर रहे महाकाली की आवाज संगठन ने पिथौरागढ़ नगर के लोगों से अपील की है कि वह बांध के विरोध में समर्थन दें। साथ ही यह भी कहा कि यदि डूब क्षेत्र की एक लाख आबादी विस्थापित होगी तो उसका असर पिथौरागढ़ नगर की व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ेगा।
संगठन से जुड़े प्रतिनिधियों ने शनिवार को बांध से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी सामने रखते हुए कहा कि बांध बनने पर कई तरह की कीट, पतंगे, जलजीव पैदा होंगे और वह बीमारियां फैलाएंगे। बांध का सीधा असर उन सैनिक परिवारों पर पड़ेगा जो डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। सीमा पर तैनात सैनिकों के सामने विस्थापन के समय नया संकट खड़ा हो जाएगा।
महाकाली की आवाज संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बांध से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ेगा। इसके अलावा भवन निर्माण सामग्री की कमी हो जाएगी। स्थानीय ठेकेदारों को बांध निर्माण के समय कोई फायदा इसलिए नहीं होगा क्योंकि बांध बनाने के लिए बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को ही ठेका मिलेगा और वह अपने हिसाब से कुशल ठेकेदारों को काम सौंपेंगे। बांध बनाने को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को देखते हुए अब संगठन ने कहा है कि यदि बांध बनाना जरूरी है तो डूब क्षेत्र के लोगों को देश के उच्चतम सर्किल रेट के आधार पर जमीन की कीमत और उतनी ही जमीन दूसरी जगह पर दी जाए।
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साथ ही प्रभावित परिवार के हर बच्चे के खाते में वयस्क होने तक 18 हजार रुपये प्रतिमाह जमा किए जाएं, हर बेरोजगार को 40 नाली जमीन, परिवार के एक सदस्य को रोजगार और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को पेंशन दी जाए। इस दौरान मजिरकांडा के प्रधान सुरेंद्र आर्या, गेठिगाड़ा के सरपंच पुष्कर सिंह गोबाड़ी, बगड़ीहाट से ललित पाल, कानड़ी के क्षेत्र पंचायत सदस्य पवन चंद, बनाड़ा के जीवन सिंह, झूलाघाट के विप्लव भट्ट, राजू चंद, संजय कुमार आदि मौजूद थे।
लोगों को पर्चे बांटे गए
डूब क्षेत्र से आये सैकड़ों लोगों ने शनिवार को भारी बारिश के बावजूद अलग-अलग टोलियों में जाकर पिथौरागढ़ नगर में पर्चे बांटे। गुलाबी रंग का पर्चा डूब क्षेत्र के गांवों में और पीले रंग का पर्चा डूब क्षेत्र से बाहर के इलाकों में बांटा जा रहा है। इन पर्चों में डूब क्षेत्र और डूब क्षेत्र के बाहर के इलाके को बांध बनने के बाद होने वाले नुकसान की जानकारी दी गई है।
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संगठन से जुड़े प्रतिनिधियों ने शनिवार को बांध से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी सामने रखते हुए कहा कि बांध बनने पर कई तरह की कीट, पतंगे, जलजीव पैदा होंगे और वह बीमारियां फैलाएंगे। बांध का सीधा असर उन सैनिक परिवारों पर पड़ेगा जो डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। सीमा पर तैनात सैनिकों के सामने विस्थापन के समय नया संकट खड़ा हो जाएगा।
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महाकाली की आवाज संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बांध से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ेगा। इसके अलावा भवन निर्माण सामग्री की कमी हो जाएगी। स्थानीय ठेकेदारों को बांध निर्माण के समय कोई फायदा इसलिए नहीं होगा क्योंकि बांध बनाने के लिए बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को ही ठेका मिलेगा और वह अपने हिसाब से कुशल ठेकेदारों को काम सौंपेंगे। बांध बनाने को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को देखते हुए अब संगठन ने कहा है कि यदि बांध बनाना जरूरी है तो डूब क्षेत्र के लोगों को देश के उच्चतम सर्किल रेट के आधार पर जमीन की कीमत और उतनी ही जमीन दूसरी जगह पर दी जाए।
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साथ ही प्रभावित परिवार के हर बच्चे के खाते में वयस्क होने तक 18 हजार रुपये प्रतिमाह जमा किए जाएं, हर बेरोजगार को 40 नाली जमीन, परिवार के एक सदस्य को रोजगार और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को पेंशन दी जाए। इस दौरान मजिरकांडा के प्रधान सुरेंद्र आर्या, गेठिगाड़ा के सरपंच पुष्कर सिंह गोबाड़ी, बगड़ीहाट से ललित पाल, कानड़ी के क्षेत्र पंचायत सदस्य पवन चंद, बनाड़ा के जीवन सिंह, झूलाघाट के विप्लव भट्ट, राजू चंद, संजय कुमार आदि मौजूद थे।
लोगों को पर्चे बांटे गए
डूब क्षेत्र से आये सैकड़ों लोगों ने शनिवार को भारी बारिश के बावजूद अलग-अलग टोलियों में जाकर पिथौरागढ़ नगर में पर्चे बांटे। गुलाबी रंग का पर्चा डूब क्षेत्र के गांवों में और पीले रंग का पर्चा डूब क्षेत्र से बाहर के इलाकों में बांटा जा रहा है। इन पर्चों में डूब क्षेत्र और डूब क्षेत्र के बाहर के इलाके को बांध बनने के बाद होने वाले नुकसान की जानकारी दी गई है।