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डूब क्षेत्र की जमीन और मकान का रेट एक हो
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:55 AM IST
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पिथौरागढ़। पंचेश्वर बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को महाकाली के किनारे स्थित गांव के लोगों ने अव्यावहारिक और समझ से परे करार दिया है। महाकाली के किनारे स्थित द्वालीसेरा गांव में हुई पंचायत स्तर की जनसुनवाई में लोगों ने कई मुद्दे उठाते हुए कहा कि पूरे डूब क्षेत्र की जमीन और मकानों का दाम एक होना चाहिए। गांव और कस्बों के लोगों को समान रूप से मुआवजा मिलना चाहिए।
जिस व्यक्ति की जितनी जमीन डूब क्षेत्र में आ रही है उससे दोगुनी जमीन नई जगह पर दी जाए। ग्राम प्रधान पद्म सिंह धामी ने गांव के लोगों की तरफ से पक्ष रखते हुए कहा कि यदि गांव के लोगों को देने के लिए जमीन उपलब्ध न हो तो उनको वर्तमान जमीन का बीस गुना मुआवजा दिया जाए। डूब क्षेत्र के बच्चों को सरकारी सेवा में आरक्षण दिया जाए और आरक्षण की यह व्यवस्था अगले 20 वर्ष तक जारी रहे। विस्थापित होने वाले परिवार के मुखिया को अगले 20 साल तक 10 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाए।
उन्होंने कहा कि जो लोग भूमिहीन हैं, उनके नाम पर दस नाली जमीन का कागजात तैयार किया जाए और इतनी जमीन का मुआवजा उनको भी दिया जाए। भूस्खलन वाले इलाकों को भी डीपीआर में शामिल किया जाए तथा इस जमीन का भी संबंधित मालिकों को मुआवजा दिया जाए। प्रधान ने कहा कि यदि सरकार इन बातों को नहीं मानती तो बांध के विरोध में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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जिस व्यक्ति की जितनी जमीन डूब क्षेत्र में आ रही है उससे दोगुनी जमीन नई जगह पर दी जाए। ग्राम प्रधान पद्म सिंह धामी ने गांव के लोगों की तरफ से पक्ष रखते हुए कहा कि यदि गांव के लोगों को देने के लिए जमीन उपलब्ध न हो तो उनको वर्तमान जमीन का बीस गुना मुआवजा दिया जाए। डूब क्षेत्र के बच्चों को सरकारी सेवा में आरक्षण दिया जाए और आरक्षण की यह व्यवस्था अगले 20 वर्ष तक जारी रहे। विस्थापित होने वाले परिवार के मुखिया को अगले 20 साल तक 10 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाए।
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उन्होंने कहा कि जो लोग भूमिहीन हैं, उनके नाम पर दस नाली जमीन का कागजात तैयार किया जाए और इतनी जमीन का मुआवजा उनको भी दिया जाए। भूस्खलन वाले इलाकों को भी डीपीआर में शामिल किया जाए तथा इस जमीन का भी संबंधित मालिकों को मुआवजा दिया जाए। प्रधान ने कहा कि यदि सरकार इन बातों को नहीं मानती तो बांध के विरोध में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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