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पांच सौ घरों में जाते हैं जोहारी होल्यार
Updated Wed, 28 Feb 2018 10:49 PM IST
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। जोहार घाटी से यहां आकर बसे जोहारी समाज के लोगों ने होली की अपनी परंपरा को जीवित रखा है। जोहारी समाज के लोग खास अंदाज में होली मनाते हैं और होली के पांच दिनों में यहां रहने वाले जोहारी समाज के 500 घरों तक होली गायक पहुंचते हैं। हर घर में होल्यारों का गुजिया, मिठाई के साथ-साथ जोहारी व्यंजन ज्या (नमकीन चाय) से स्वागत होता है। होल्यारों के स्वागत के लिए महिलाएं पूरी तैयारी करती हैं।
जोहार जनजाति संगठन होली के इस कार्यक्रम की शुरुआत नवीन टोलिया के आवास से करता है। एकादशी के दिन चीर बंधन के साथ होली शुरू होती है। जोहारी समाज के लोग सिर्फ खड़ी होली का गायन करते हैं। रोज होली गायक नगर क्षेत्र में कम से कम चार किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। किसी भी परिवार को वंचित नहीं किया जाता। वहां पर एक होली गीत गाया जाता है और परिवार के सदस्यों को होली की बधाई देकर होल्यार अगले घर की तरफ बढ़ जाते हैं।
जोहार जनजाति संगठन के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह टोलिया ने बताया कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। नई पीढ़ी के लोग भी इसमें काफी दिलचस्पी लेते हैं। जोहारी समाज के होल्यारों का दल रोज दोपहर 12 बजे एकत्र होता है और शाम सात बजे तक होली गायन चलता रहता है।
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जोहार जनजाति संगठन होली के इस कार्यक्रम की शुरुआत नवीन टोलिया के आवास से करता है। एकादशी के दिन चीर बंधन के साथ होली शुरू होती है। जोहारी समाज के लोग सिर्फ खड़ी होली का गायन करते हैं। रोज होली गायक नगर क्षेत्र में कम से कम चार किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। किसी भी परिवार को वंचित नहीं किया जाता। वहां पर एक होली गीत गाया जाता है और परिवार के सदस्यों को होली की बधाई देकर होल्यार अगले घर की तरफ बढ़ जाते हैं।
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जोहार जनजाति संगठन के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह टोलिया ने बताया कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। नई पीढ़ी के लोग भी इसमें काफी दिलचस्पी लेते हैं। जोहारी समाज के होल्यारों का दल रोज दोपहर 12 बजे एकत्र होता है और शाम सात बजे तक होली गायन चलता रहता है।
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