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डूब क्षेत्र में आने वाली सड़कों के विकल्पों पर ध्यान देना होगा

Sun, 10 Dec 2017 10:34 PM IST
Updated Sun, 10 Dec 2017 10:34 PM IST
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डूब क्षेत्र में आने वाली सड़कों के विकल्पों पर ध्यान देना होगा
पिथौरागढ़। काली, गोरी, रामगंगा, सरयू नदियों का प्रवाह रोककर बनाए जाने वाले पंचेश्वर बांध से टनकपुर-पिथौरागढ़ बारहमासी सड़क के साथ ही अल्मोड़ा, हल्द्वानी, गंगोलीहाट, धारचूला को जोड़ने वाली सड़कें प्रभावित होंगी। बांध निर्माण की हलचल के बीच डूब क्षेत्र में आ रही सड़कों के विकल्पों पर बात होती नहीं दिख रही है।
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33000 करोड़ की लागत से बनने वाला पंचेश्वर बांध रामेश्वर, घाट, पनार, पंचेश्वर घाटी को लील जाएगा। घाट-टनकपुर मार्ग के 6 किमी हिस्से के साथ ही घाट से अल्मोड़ा और गंगोलीहाट को जाने वाली सड़क का भी काफी हिस्सा बांध में डूब जाएगा। टनकपुर-पिथौरागढ़-धारचूला राजमार्ग जौलजीबी में बांध से प्रभावित होगा। पिथौरागढ़ के लिए निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीबी मार्ग का भी विकल्प भी नहीं रह जाएगा, क्योंकि इस मार्ग का अधिकांश हिस्सा बांध में डूबने जा रहा है। पिथौरागढ़ के लिए सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के लिए घाट के उस पार से डूब क्षेत्र से बाहर से नया मार्ग बनाना होगा। हल्द्वानी और अल्मोड़ा से पिथौरागढ़ के लिए लोहाघाट-जागेश्वर-गंगोलीहाट-आंवलाघाट-चंडाक सड़क को जोड़ना होगा।
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इस रूट पर जिला मुख्यालय से आंवलाघाट तक, गंगोलीहाट से आंवलाघाट से ऊपर अग्रोन तक सड़क बनी है। गंगोलीहाट से अल्मोड़ा की ओर पव्वाधार तक सड़क निर्माण हो चुका है। जागेश्वर के पास नैनी (अल्मोड़ा) से पिथौरागढ़ की सीमा पर सरयू नदी के पास सेरागड़ा तक सड़क बननी है। गंगोलीहाट के पव्वाधार से सेरागड़ा तक सड़क का निर्माण होना है।
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लोहाघाट से वाया दन्यां होते हुए नैनी तक सड़क बनी है। इसी रूट से यातायात संचालन भविष्य की जरूरत है। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन चंद्र भट्ट कहते हैं कि यदि बांध का कार्य जल्द शुरू होना है तो वैकल्पिक मार्ग बनाने पर देरी नहीं होनी चाहिए।


रेल परियोजना खटाई में
पंचेश्वर बांध बनने से पहाड़ पर रेल लाइन का सपना अधूरा रह जाएगा। इससे प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर, टनकपुर-जौलजीबी रेल लाइन नहीं बन पाएगी। नदी घाटी से लगी दोनों प्रस्तावित रेल परियोजनाओं की अधिकतर भूमि बांध के आगोश में चली जाएगी।
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