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खुले में शौच को जाने पर मजबूर है हयात

Mon, 17 Dec 2018 11:07 PM IST
Updated Mon, 17 Dec 2018 11:07 PM IST
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खुले में शौच को जाने पर मजबूर है हयात
बेड़ीनाग (पिथौरागढ़)। तहसील के रैतोली ग्राम पंचायत के रीठा गांव निवासी 64 वर्षीय हयात सिंह खनका खुले में शौच मुक्त राज्य होने के दावे को आइना दिखा रहे हैं। गांव में परिवार के इकलौते सदस्य हयात की दिनचर्या नजदीकी गधेरे में शौच जाने से शुरू होती है। इस दौरान जंगली सुअरों का भय भी रहता है। एक-दो बार सुअरों के हमले में वह बाल-बाल बचे हैं।
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हयात सिंह की पत्नी की पूर्व में मृत्यु हो चुकी है। विवाहिता बेटी के अलावा दो पुत्र रिश्तेदारों के घर रह कर पढ़ाई करते हैं। मजदूरी से जीवन यापन करने वाले हयात शौचालय के लिए लंबे समय से सरकारी मदद की उम्मीद लगाए हुए हैं।
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सामाजिक कार्यकर्ता भवान सिंह बोहरा का कहना है कि एक साल पहले हयात की शौचालय की आवेदन वाली फाइल औपचारिकताएं पूरी करने के बाद स्वजल परियोजना के पिथौरागढ़ कार्यालय में उन्होंने स्वयं जमा की थी। जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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12 परिवारों को है सरकारी मदद का इंतजार
बेड़ीनाग। ग्राम पंचायत रैतोली के एक दर्जन गरीब परिवार अब भी शौचालय निर्माण के लिए सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं। ग्राम पंचायत के असुर तोक के भुवन जोशी, महेश जोशी, जीवन जोशी और दान सिंह, रैतोली तोक के भूपेंद्र प्रसाद, प्रताप सिंह, श्याम सिंह, शेर सिंह और रीठा तोक के हयात सिंह, बसंत धारियाल, बिशन राम और नंदन राम के पास शौचालय नहीं हैं। हालांकि इन परिवारों के लोग पड़ोसियों के शौचालय का प्रयोग कर रहे हैं। इसके अलावा गांव के माधव सिंह, गोविंदी देवी, पूरन राम, देवकी देवी और शांति देवी को स्वजल विभाग ने प्रेरित कर 12 दिनों के भीतर शौचालय तो बनवा दिए हैं, लेकिन इन्हें एक साल बाद भी तय धनराशि 12 हजार रुपये नहीं दिए गए हैं।

गांव में रहते हैं 160 परिवार
बेड़ीनाग। ग्राम पंचायत रैतोली के उप प्रधान योगेंद्र प्रसाद जोशी का कहना है कि गांव में लगभग 160 परिवार रहते हैं। पूर्व में 34 बीपीएल परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए प्रत्येक को 2700 रुपये मिले थे। बाद में मनरेगा के माध्यम से 22 परिवारों को प्रत्येक को 12 हजार रुपये शौचालय निर्माण के लिए स्वीकृत किए गए, लेकिन इनमें से कई लोगों को पूरा भुगतान नहीं हुआ है। बताया कि स्वजल परियोजना के माध्यम से अब तक 30 परिवारों को बारह-बारह हजार रुपये का भुगतान किया गया है।


वर्ष 2012-13 की बेस लाइन सर्वे के आधार पर गांवों में शौचालयों के निर्माण के बाद खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया है। सर्वे में छूट गए लोगों की अब आनलाइन सूची बन रही है। -हिमांशु पांडेय, ब्लॉक समन्वयक स्वजल।
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