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हिम तेंदुओं के घर में बाघ की दस्तक
Updated Wed, 12 Dec 2018 10:56 PM IST
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धारचूला/पिथौरागढ़। धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्र में बाघों का पता लगाने के लिए वन विभाग ने हाई एल्टीट्यूड टाइगर प्रोजेक्ट के तहत संभावित स्थलों पर ट्रैपिंग कैमरे लगाने का फैसला किया है। चार वर्ष पहले कनार रेंज में भी बाघ देखा गया था। उस समय वन विभाग ने कैमरा ट्रैप लगाया तो इस बाघ की तस्वीर भी कैद हुई थी।
पहाड़ और हिमालयी क्षेत्र में केवल तेंदुए होते हैं। पिछले कुछ समय से उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में बाघ देखा गया है। चरवाहों और ग्रामीणों द्वारा कई बार बाघ देखे जाने की सूचना पर वन विभाग उन स्थानों की सूची तैयार कर रहा हैं जहां बाघ देखा गया। इसके बाद उन स्थलों पर ट्रैपिंग कैमरे लगाए जाएंगे। हाई एल्टीट्यूड टाइगर प्रोजेक्ट के अध्यक्ष सेवानिवृत्त एडीजी बीएस बोनाल के निर्देशन में इस प्रोजेक्ट के तहत जानकारी जुटाने का कार्य शुरू हो गया है।
धारचूला के वन क्षेत्राधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि धारचूला और अस्कोट वन क्षेत्र के कर्मचारियों की ओर से ग्रामीणों और चरवाहों से सूचना एकत्र की जा रही हैं। चार वर्ष पहले भी कनार रेंज में एक बाघ ट्रैपिंग कैमरे में कैद हुआ था। सुनील कुमार ने बताया कि बाघ तराई में होता है। ग्रामीण और बुग्यालों में जाने वाले चरवाहों ने बाघ देखने की बात कही है। इसे देखते हुए ट्रैपिंग कैमरे लगाने की योजना है।
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पहाड़ और हिमालयी क्षेत्र में केवल तेंदुए होते हैं। पिछले कुछ समय से उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में बाघ देखा गया है। चरवाहों और ग्रामीणों द्वारा कई बार बाघ देखे जाने की सूचना पर वन विभाग उन स्थानों की सूची तैयार कर रहा हैं जहां बाघ देखा गया। इसके बाद उन स्थलों पर ट्रैपिंग कैमरे लगाए जाएंगे। हाई एल्टीट्यूड टाइगर प्रोजेक्ट के अध्यक्ष सेवानिवृत्त एडीजी बीएस बोनाल के निर्देशन में इस प्रोजेक्ट के तहत जानकारी जुटाने का कार्य शुरू हो गया है।
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धारचूला के वन क्षेत्राधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि धारचूला और अस्कोट वन क्षेत्र के कर्मचारियों की ओर से ग्रामीणों और चरवाहों से सूचना एकत्र की जा रही हैं। चार वर्ष पहले भी कनार रेंज में एक बाघ ट्रैपिंग कैमरे में कैद हुआ था। सुनील कुमार ने बताया कि बाघ तराई में होता है। ग्रामीण और बुग्यालों में जाने वाले चरवाहों ने बाघ देखने की बात कही है। इसे देखते हुए ट्रैपिंग कैमरे लगाने की योजना है।
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