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जौलजीबी मेले में पहुंचे हुमली-जुमली के घोड़े
Updated Wed, 21 Nov 2018 10:52 PM IST
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जौलजीबी/धारचूला। जौलजीबी मेला एवं विकास प्रदर्शनी में प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी रही है। बुधवार को बड़ी संख्या में मेलार्थी खरीदारी के लिए लोग पहुंचे। हुमली जुमली के घोड़े भी बिक्री के लिए जौलजीबी पहुंच गए हैं।
ऐतिहासिक एवं व्यापारिक महत्व का जौलजीबी मेला धीरे-धीरे पूरे शबाब पर आता जा रहा है। बुधवार को अवकाश होने से बड़ी संख्या में मेलार्थी जौलजीबी पहुंचे। जिला मुख्यालय से भी मेलार्थियों ने जौलजीबी पहुंचकर ऊनी कपड़ों की खरीदारी की। मेले में तिब्बती भेड़ों के ऊन से निर्मित गर्म कपड़ों की काफी बिक्री हो रही है। सुबह से ही मेला स्थल पर लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो रहा है। रात्रि में भी लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने के लिए पहुंच रहे हैं।
उधर, नेपाल में भी छह दिनी मेले में बड़ी संख्या में मेलार्थी पहुंच रहे हैं। दोनों देशों में मेला होने से झूलापुल पर भी दिन भर लोगों की आवाजाही बनी है। झूलापुल से आवाजाही करने वालों पर सशस्त्र सीमा पुलिस द्वारा नजर रखी जा रही है।
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वहीं, जौलजीबी मेले में हुमली-जुमली के घोड़े भी पहुंच गए हैं। नेपाल के दूरस्थ हुमली-जुमली से जौलजीबी पहुंचने में एक माह का समय लगता है। मजबूत कद-काठी के चलते इन घोड़ों की भारत में काफी मांग है। घोड़ों के बिक्री के लिए पहुंचने से खरीदार भी पहुंचने लगे हैं। मंगलवार शाम भी सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग देर रात तक पंडाल में डटे रहे।
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ऐतिहासिक एवं व्यापारिक महत्व का जौलजीबी मेला धीरे-धीरे पूरे शबाब पर आता जा रहा है। बुधवार को अवकाश होने से बड़ी संख्या में मेलार्थी जौलजीबी पहुंचे। जिला मुख्यालय से भी मेलार्थियों ने जौलजीबी पहुंचकर ऊनी कपड़ों की खरीदारी की। मेले में तिब्बती भेड़ों के ऊन से निर्मित गर्म कपड़ों की काफी बिक्री हो रही है। सुबह से ही मेला स्थल पर लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो रहा है। रात्रि में भी लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने के लिए पहुंच रहे हैं।
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उधर, नेपाल में भी छह दिनी मेले में बड़ी संख्या में मेलार्थी पहुंच रहे हैं। दोनों देशों में मेला होने से झूलापुल पर भी दिन भर लोगों की आवाजाही बनी है। झूलापुल से आवाजाही करने वालों पर सशस्त्र सीमा पुलिस द्वारा नजर रखी जा रही है।
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वहीं, जौलजीबी मेले में हुमली-जुमली के घोड़े भी पहुंच गए हैं। नेपाल के दूरस्थ हुमली-जुमली से जौलजीबी पहुंचने में एक माह का समय लगता है। मजबूत कद-काठी के चलते इन घोड़ों की भारत में काफी मांग है। घोड़ों के बिक्री के लिए पहुंचने से खरीदार भी पहुंचने लगे हैं। मंगलवार शाम भी सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग देर रात तक पंडाल में डटे रहे।