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60 हेक्टेयर भूमि में होगा बीज उत्पादन
Updated Tue, 16 Oct 2018 10:42 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत के किसानों को सस्ते दामों पर बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग की ओर से 60 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है। इस भूमि में गेहूं, मसूर, चना, सरसों के आदि के बीज तैयार कर स्थानीय स्तर पर किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
जिले में तराई बीज विकास निगम के अलावा अन्य एजेंसियां बीज उपलब्ध कराती हैं। बुवाई के समय किसानों को पर्याप्त मात्रा में पर्वतीय मौसम के अनुकूल बीज की प्रजाति नहीं मिल पाती है। अब कृषि विभाग ने बीज उत्पादन करने के लिए धारचूला विकास खंड में 40 और कनालीछीना, गंगोलीहाट में 10-10 हेक्टेयर भूमि का चयन किया है।
मुख्य कृषि रक्षा अधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने बताया कि सीमांत जिले में 20 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती होती है। बुवाई के समय करीब 1500 क्विंटल गेहूं का ही बीज मिल पाता है, जो कि कम पड़ जाता है। उनका कहना है कि बीज उत्पादन के लिए किसानों को आधारीय बीज, दवाइयां निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाएगा। यदि बीज गुणवत्तायुक्त हुआ तो किसानों को 200 रुपये अतिरिक्त बोनस भी दिया जाएगा।
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परंपरागत फसलों को मिलेगा बढ़ावा
पिथौरागढ़। पर्वतीय क्षेत्रों में फसलों की कई ऐसी प्रजातियां थीं जो वर्तमान में विलुप्त हो गई हैं। पूर्व में सीमांत में लाल धान काफी होता था। यह पौष्टिक होने के साथ ही काफी खुशबू भी बिखेरता था। अब कई स्थानों पर यह विलुप्त हो गया है। कृषि विभाग ने परंपरागत फसलों को बढ़ावा देने के लिए 210 कलस्टर तैयार किए हैं। इसके अलावा उद्यान, भेषज के 118 और रेशम के 10 कलस्टर भी तैयार किए गए हैं। मुख्य कृषि अधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने बताया कि इन कलस्टरों के माध्यम से परंपरागत और जैविक उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे।
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जिले में तराई बीज विकास निगम के अलावा अन्य एजेंसियां बीज उपलब्ध कराती हैं। बुवाई के समय किसानों को पर्याप्त मात्रा में पर्वतीय मौसम के अनुकूल बीज की प्रजाति नहीं मिल पाती है। अब कृषि विभाग ने बीज उत्पादन करने के लिए धारचूला विकास खंड में 40 और कनालीछीना, गंगोलीहाट में 10-10 हेक्टेयर भूमि का चयन किया है।
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मुख्य कृषि रक्षा अधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने बताया कि सीमांत जिले में 20 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती होती है। बुवाई के समय करीब 1500 क्विंटल गेहूं का ही बीज मिल पाता है, जो कि कम पड़ जाता है। उनका कहना है कि बीज उत्पादन के लिए किसानों को आधारीय बीज, दवाइयां निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाएगा। यदि बीज गुणवत्तायुक्त हुआ तो किसानों को 200 रुपये अतिरिक्त बोनस भी दिया जाएगा।
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परंपरागत फसलों को मिलेगा बढ़ावा
पिथौरागढ़। पर्वतीय क्षेत्रों में फसलों की कई ऐसी प्रजातियां थीं जो वर्तमान में विलुप्त हो गई हैं। पूर्व में सीमांत में लाल धान काफी होता था। यह पौष्टिक होने के साथ ही काफी खुशबू भी बिखेरता था। अब कई स्थानों पर यह विलुप्त हो गया है। कृषि विभाग ने परंपरागत फसलों को बढ़ावा देने के लिए 210 कलस्टर तैयार किए हैं। इसके अलावा उद्यान, भेषज के 118 और रेशम के 10 कलस्टर भी तैयार किए गए हैं। मुख्य कृषि अधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने बताया कि इन कलस्टरों के माध्यम से परंपरागत और जैविक उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे।