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कुदरत के कहर ने मुंह में ठूंसे पुनर्वास, विस्थापन जैसे शब्द
Updated Sun, 29 Jul 2018 11:31 PM IST
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पिथौरागढ़। दो जुलाई की आपदा ने बंगापानी तहसील के लोदीबगड़ और दानीबगड़ के लोगों को अपने पुरखों की थाती को छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। दोनों गांवों के 17 परिवारों पर गोरी नदी कहर बनकर टूटी है।
यह लोग अपनी माटी से कभी भी दूर होना नहीं चाहते थे। अब इन लोगों को पुनर्वास और विस्थापन की बात करनी पड़ रही है। प्रभावित परिवारों ने लोदी गांव (सेराघाट) में शरण ली हुई है।
दो जुलाई की आपदा ने गोरी नदी के तट के पास बसे लोदीबगड़ में जमकर कहर बरपाया था। मकानों के पास तक की जमीन को गोरी ने लील लिया। लोदीबगड़ में जोगा राम,
महेश राम, गुमानी राम, गायत्री देवी, रोशनी देवी, हीरा देवी, पानुली देवी, अशोक राम, पास के ही चुकानी बगड़ में भवानी देवी, प्रह्लाद सिंह के मकान रहने लायक नहीं रह गए हैं। दानीबगड़ में हयात सिंह, प्रेम सिंह समेत सात परिवारों के मकान खतरे की जद में आए हैं।
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यह लोग अपनी माटी से कभी भी दूर होना नहीं चाहते थे। अब इन लोगों को पुनर्वास और विस्थापन की बात करनी पड़ रही है। प्रभावित परिवारों ने लोदी गांव (सेराघाट) में शरण ली हुई है।
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दो जुलाई की आपदा ने गोरी नदी के तट के पास बसे लोदीबगड़ में जमकर कहर बरपाया था। मकानों के पास तक की जमीन को गोरी ने लील लिया। लोदीबगड़ में जोगा राम,
महेश राम, गुमानी राम, गायत्री देवी, रोशनी देवी, हीरा देवी, पानुली देवी, अशोक राम, पास के ही चुकानी बगड़ में भवानी देवी, प्रह्लाद सिंह के मकान रहने लायक नहीं रह गए हैं। दानीबगड़ में हयात सिंह, प्रेम सिंह समेत सात परिवारों के मकान खतरे की जद में आए हैं।
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