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प्रतिबंधित इलाकों में परमिट की व्यवस्था को

Tue, 27 Mar 2018 12:11 AM IST
Updated Tue, 27 Mar 2018 12:11 AM IST
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प्रतिबंधित इलाकों में परमिट की व्यवस्था को

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नई दिल्ली/पिथौरागढ़।
विदेश से आने वाले पर्यटक जल्द ही उन खूबसूरत क्षेत्रों में भी घुमक्कड़ी का लाभ उठा पाएंगे, जहां अब तक सरकारी प्रतिबंध के चलते उन्हें जाने की अनमुति नहीं दी जाती है। केंद्र सरकार ने ऐसे क्षेत्रों में बिना स्पेशल परमिट के भी घूमने की अनुमति देने की तैयारी कर ली है। हालांकि ये छूट पाकिस्तान और चीन से आने वाले पर्यटकों पर लागू नहीं होगी। इस फैसले से पिथौरागढ़ जिले के धारचूला इलाके के लोग स्तब्ध हैं जो इनर लाइन को छियालेख से दोबारा जौलजीबी में लाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि परमिट बिना इन इलाकों में विदेशियों को आने की अनुमति देना सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है। वह बाहरी लोगों के दखल का शुरू से विरोध करते आ रहे हैं।

दरअसल केंद्रीय गृह मंत्रालय छह दशकों से चली आ रही उस प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट व्यवस्था को जांच रहा है, जिसके तहत अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड के सभी हिस्सों और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के कुछ प्रतिबंधित क्षेत्रों में विदेशियों को प्रवेश से पहले स्पेशल परमिशन लेनी होती है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू ने कहा, राज्य सरकारों के साथ विदेशी पर्यटकों के लिए लागू प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट व्यवस्था में छूट देने को लेकर सलाह की जा रही है। रिजिजू ने कहा, गृह मंत्रालय राज्य सरकारों के साथ ही अन्य एजेंसियों के साथ भी मिलकर उन संभावित क्षेत्रों की पहचान कर रहा है, जहां संरक्षित क्षेत्र परमिट और प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट व्यवस्था में छूट दी जा सकती है।
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क्यों पड़ी जरूरत
ये कवायद पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही स्थानीय निवासियों के लिए नौकरियों के मौके बढ़ाने और राज्य के लिए राजस्व बढ़ाने के नजरिए से की जा रही है।
क्या है प्रतिबंधित क्षेत्र
विदेशी (प्रतिबंधित क्षेत्र) ऑर्डर-1958 के तहत केंद्र सरकार ने इन राज्यों के उन क्षेत्रों को प्रतिबंधित घोषित किया हुआ है, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा और आंतरिक रेखा की दोहरी सीमा व्यवस्था के बीच में आते हैं।
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क्षेत्र में बाहरी लोगों का दखल ठीक नहीं
धारचूला। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष अशोक नबियाल, व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा, रं कल्याण संस्था अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल, लक्ष्मी रायपा, पुष्पा देवी, गंगोत्री नपलच्याल, अर्चन देवी आदि क्षेत्रवासियों का मानना है कि जौलजीबी से इनर लाइन जाने के बाद क्षेत्र में सभी की आवाजाही आसान हुई है। क्षेत्र में बाहरी लोगों का दखल बढ़ा है। इससे सामरिक मोर्चे पर भारत को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने देशहित में इनर लाइन दोबारा जौलजीबी लाने की मांग दोहराई है। इस संबंध में एसडीएम आरके पांडेय का कहना है कि पूर्व में ही गृह मंत्रालय को ज्ञापन भेजकर क्षेत्रवासियों की भावनाओं से अवगत करा दिया है। इनर लाइन के मामले में यथास्थिति बरकरार है।
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