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एनएच पर जाम लगाने वाले 32 लोग दोषमुक्त
Updated Thu, 02 Nov 2017 10:59 PM IST
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पिथौरागढ़। नेपाल सीमा पर स्थित सल्लाचिंगरी इंटर कॉलेज में शिक्षकों की तैनाती की मांग को लेकर 20 जुलाई 2015 को टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच पर कंतगांव के पास जाम लगाने वाले जिन 32 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, उन सभी को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने 32 लोगों के खिलाफ धारा 143, 341, 147, 353, 504 के अलावा 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट में मुकदमा दर्ज किया था।
आरोपियों की तरफ से अदालत में पैरवी कर रहे वकील आलोक चौधरी और केसी पंत ने सभी तथ्य सामने रखे। वकील आलोक चौधरी ने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नेहा कय्यूम ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुना दिया और जाम लगाने वाले सुरेश राम, शेर राम, शेरी चंद, दीपक मल्ल, राकेश मल्ल, धनी चंद, गोविंद राम, अर्जुन सिंह, विक्रम, सूरज कुमार, नंदा देवी, सावित्री देवी, विनोद कुमार, बहादुर राणा, सुरेश चंद, गीता देवी, राजेंद्र सिंह राणा, कैलाश चंद, रेखा देवी, मोहन चंद, प्रेम राम, भागू देवी, सूना देवी, मोहन सिंह भाटिया, पशुपति देवी, पुष्कर चंद, भरत सिंह, नारायण सिंह, देव सिंह, कल्याण सिंह, लक्ष्मण सिंह, अनीता देवी को दोषमुक्त करार दिया।
बताया गया कि जाम लगने की सूचना पर तत्कालीन उपजिलाधिकारी सदर अनुराग आर्य मौके पर पहुंचे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जाम लगाने के लिए 150 लोग उपस्थित थे। इन लोगों ने शासन और प्रशासन के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया था। यह मामला काफी चर्चा में रहा। अदालत ने एक नवंबर को यह आदेश जारी किया।
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आरोपियों की तरफ से अदालत में पैरवी कर रहे वकील आलोक चौधरी और केसी पंत ने सभी तथ्य सामने रखे। वकील आलोक चौधरी ने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नेहा कय्यूम ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुना दिया और जाम लगाने वाले सुरेश राम, शेर राम, शेरी चंद, दीपक मल्ल, राकेश मल्ल, धनी चंद, गोविंद राम, अर्जुन सिंह, विक्रम, सूरज कुमार, नंदा देवी, सावित्री देवी, विनोद कुमार, बहादुर राणा, सुरेश चंद, गीता देवी, राजेंद्र सिंह राणा, कैलाश चंद, रेखा देवी, मोहन चंद, प्रेम राम, भागू देवी, सूना देवी, मोहन सिंह भाटिया, पशुपति देवी, पुष्कर चंद, भरत सिंह, नारायण सिंह, देव सिंह, कल्याण सिंह, लक्ष्मण सिंह, अनीता देवी को दोषमुक्त करार दिया।
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बताया गया कि जाम लगने की सूचना पर तत्कालीन उपजिलाधिकारी सदर अनुराग आर्य मौके पर पहुंचे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जाम लगाने के लिए 150 लोग उपस्थित थे। इन लोगों ने शासन और प्रशासन के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया था। यह मामला काफी चर्चा में रहा। अदालत ने एक नवंबर को यह आदेश जारी किया।
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