फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   कन्या इंटर कालेज में भाषा पढ़ाने वाले प्रवक्ता नहीं

कन्या इंटर कालेज में भाषा पढ़ाने वाले प्रवक्ता नहीं

Sat, 05 Aug 2017 11:04 PM IST
Updated Sat, 05 Aug 2017 11:04 PM IST
विज्ञापन
कन्या इंटर कालेज में भाषा पढ़ाने वाले प्रवक्ता नहीं
थल (पिथौरागढ़)। राजकीय कन्या इंटर कॉलेज थल में चार विषयों के प्रवक्ता नहीं हैं। हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी के साथ-साथ जीव विज्ञान विषय के प्रवक्ता का पद लंबे समय से रिक्त है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि 2010 में उच्चीकरण होने के बाद से इन पदों को भरा नहीं गया है।
विज्ञापन


विद्यालय में प्रवक्ताओं के नौ पद सृजित हैं, इनमें से सिर्फ पांच पदों पर ही प्रवक्ता काम कर रहे हैं। एलटी में भी विज्ञान और गणित जैसे अहम विषयों में शिक्षक नहीं हैं। शिक्षकों की कमी के कारण विद्यालय में पढ़ने वाली 352 छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
विज्ञापन


प्रधानाचार्य डा. आशा जोशी दावा करती हैं कि शिक्षकों की कमी के बावजूद शिक्षण कार्य को व्यवस्थित किया गया है। अन्य शिक्षिकाओं को अहम विषय पढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही रिक्त पदों की जानकारी मुख्य शिक्षा अधिकारी के माध्यम से शिक्षा निदेशालय को भेजी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही कुछ पदों में तैनाती हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह बालिका शिक्षा के साथ अन्याय
अभिभावक संघ के अध्यक्ष कवींद्र चंद का कहना है कि शिक्षिकाओं के इतने ज्यादा पद रिक्त छोड़ना बालिका शिक्षा के साथ अन्याय है। वह कहते हैं कि कई बार शिक्षिकाओं के पद भरने की मांग की गई, लेकिन उच्चीकरण के बाद अब तक पदों का न भरा जाना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

इस अव्यवस्था का भारी नुकसान
अभिभावक महिपाल सत्याल का कहना है कि थल के इस विद्यालय में दूरदराज की छात्राएं पढ़ने आती हैं, यदि इसकी व्यवस्था ठीक होती तो कई बालिकाओं को फायदा मिलता, लेकिन सरकार ने जैसे ग्रामीण अंचलों के विद्यालयों की तरफ आंख ही बंद कर दी है। इसका बड़ा नुकसान हो रहा है।

अभिभावक मजबूर स्थिति में
समाजसेवी भुवन भट्ट का कहना है कि भाषा को पढ़ाने के लिए ही प्रवक्ता नहीं हैं, जबकि भाषा अनिवार्य विषय होता है। इस कमी को पूरा करने की कई बार मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आंदोलन करने से भी सरकार पर कोई असर नहीं पड़ता। अभिभावक मजबूर हैं।


अब जल्द ही आंदोलन छेड़ेंगे
समाजसेवी बसंत लोहनी कहते हैं कि अब छात्राओं को साथ लेकर आंदोलन चलाया जाएगा। सरकार कैसे सरकारी शिक्षा की दशा सुधारने की बात कर रही है। बेटियों को पढ़ाने के लिए अभियान का अर्थ क्या है, जब उनको पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं हैं। जल्द ही कुछ कदम उठाए जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed