{"_id":"570936114f1c1b5b27c810cc","slug":"10-hectares-of-forest-burned-in-hupli","type":"story","status":"publish","title_hn":"हुपली में 10 हेक्टेयर वन जले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हुपली में 10 हेक्टेयर वन जले
ब्यूरो/अमर उजाला, नाचनी
Updated Sat, 09 Apr 2016 10:34 PM IST
विज्ञापन
वन जले
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आग ने सेना की पर्यावरण बटालियन की मेहनत पर पानी फेरने का काम किया है। आग से 10 हेक्टेयर क्षेत्र में पेड़ नष्ट हो गए हैं। बटालियन के जवानों और ग्रामीणों ने छह घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। बटालियन ने काफी मेहनत से बंजर भूमि पर पेड़ लगाकर हराभरा किया था। इलाके के तमाम जंगलों में जबरदस्त आग धधक रही है। वन विभाग जंगलों की आग बुझाने में नाकाम साबित हो रहा है।
विज्ञापन
शुक्रवार शाम करीब छह बजे हुपली वन पंचायत के जंगल में अचानक आग लग गई। बाथीगूठ वन पंचायत से हुपली के जंगल में पहुंची आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। बटालियन के सूबेदार केशर सिंह के नेतृत्व में 54 जवान और ग्राम प्रधान गोविंद सिंह चुफाल के नेतृत्व में ग्रामीण आग बुझाने में जुटे। रात करीब 12 बजे इन लोगों ने आग पर काबू पाया। तब तक करीब 3000 पेड़ आग की भेंट चढ़ चुके थे। पर्यावरण बटालियन पिथौरागढ़ की पंचाचूली कंपनी ने वर्ष 2013 में 30 हेक्टेयर क्षेत्र में बांज, फल्यांट, भीमल, सुरई, मनीपुरी बांज समेत 12 प्रजातियों के पौधे रोपे थे। कंपनी पौधों को पेड़ बनाने के लिए लगातार काम पर लगी हुई है। आग ने अभियान को धक्का पहुंचाया है।
विज्ञापन
उधर, बागेश्वर जिले के धरमघर रेंज के कालापैर और मुनधूरा के सिविल वन में शनिवार दोपहर 12 बजे से जबरदस्त आग लगी है। बेड़ीनाग रेंज के रिंगूनिया वन पंचायत क्षेत्र, चिल्किया में भी आग से जंगलों को नुकसान पहुंचा है। हुपली से लगी वन पंचायत कोट्यूड़ा के जंगल में शुक्रवार रात आग लग गई थी। क्षेत्र पंचायत सदस्य जगदीश सिंह बथ्याल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने आग बुझाई। क्षेत्र के 90 प्रतिशत जंगल दावाग्नि की चपेट में हैं, वन विभाग के कोई प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं।
विज्ञापन
जंगल की आग से घास और फसल जली
शुक्रवार को भुर्तिंग वन पंचायत के जंगल में लगी आग से लेटावा गांव के भवान सिंह दानू के घास के दो ढेर और फसलें जल गई। गांव के लोगों ने किसी तरह मकान तक आग पहुंचने से रोकी। लोगों का कहना है कि बाहरी लोग जंगलों से झूला निकालने के लिए आते हैं। इन लोगों ने पेड़ों की टहनियां काट रखी है। यही लोग जंगल में आग लगाते हैं।
अस्कोट में जंगल की आग आबादी तक पहुंची
अस्कोट (पिथौरागढ़)। यहां से मात्र 200 मीटर की दूरी तक शनिवार की शाम जंगल की आग पहुंच गई। यदि आग ज्यादा प्रचंड रूप लेती है, तो लोक निर्माण विभाग डिवीजन कार्यालय, अस्पताल भवन को खतरा हो सकता है। आग लगने से जंगल का काफी बड़े हिस्से को नुकसान हुआ है। कस्बे के पास ही भीषण आग लगने से वन विभाग के कर्मचारी रात में ही आग पर नियंत्रण पाने के लिए मौके के लिए रवाना हो गए हैं। बताया गया है कि शनिवार देर शाम पिथौरागढ़, धारचूला और अस्कोट लिंक रोड के बीच के जंगलों में अचानक आग धधक गई। चीड़ के जंगल में आग ने विकराल रूप ले लिया। आग आबादी के 200 मीटर दूर तक पहुंच चुकी है। वन क्षेत्राधिकारी केआर टम्टा ने बताया कि आग को बुझाने के लिए टीम भेज दी गई है। आग को आबादी तक पहुंचने से रोकने के लिए पूरा इंतजाम किया जा रहा है।