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विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही मैराथन में बनेंगी मातृशक्ति की ताकत
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्रसिद्घ पर्वतारोही शीतल।
- फोटो : PAURI
विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही शीतल मुख्यालय पौड़ी में आयोजित पहले मानसून मैराथन में मातृशक्ति की ताकत बनेंगी। शीतल बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश भी देंगी।
शीतल पिथौरागढ़ के सल्मोड़ा गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता चालक और माता गृहणी है। शीतल के दो छोटे भाई हैं। स्कूली शिक्षा के दौरान एनसीसी का हिस्सा बनना शीतल के जीवन को दिशा दे गया। दार्जिलिंग व जम्मू कश्मीर में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लेने के बाद शीतल ने वर्ष 2018 में कंचनजंघा पर्वत पर तिरंगा फहरा विश्व की सबसे युवा पर्वतारोही बनकर गिनीज बुक आफ वर्ड रिकार्ड में स्थान बनाया। इसके बाद विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह करने वाली व सबसे कम उम्र की उत्तराखंड की पहली युवा बनी। उन्होंने इसकी शुरुआत उत्तरकाशी के रुद्र गैरा ट्रैक पर ट्रेकिंग से की। शीतल ने सतोपंथ, त्रिशूल सहित अन्य कई पर्वत चोटियों पर तिरंगा फहराया है। प्रदेश सरकार ने इन्हें कभी सम्मानित नहीं किया। जबकि पर्वतारोहण के लिए शीतल के पास शूज खरीदने तक के पैसे नहीं थे। इसकी प्रतिभाग को पहचान ओएनजीसी, सिडकुल की कुछ कंपनियों व लोगों के सहयोग ने आगे बढ़ाया है। शीतल के कोच व पर्वतारोही योगेश गर्ब्याल ने बताया कि शीतल का परिवार बहुत गरीब है। शीतल ने बताया कि लड़की होने के नाते पर्वतारोहण में जाने की इजाजत मिलना आसान नहीं रहा।
350 नौनिहालों को दे रही हैं प्रशिक्षण
पौड़ी। पर्वतारोही शीतल क्षेत्र में 350 ग्रामीण नौनिहालों को पर्वतारोहण व आपदा से जुड़ा प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। केएमवीएन के सहयोग से यह प्रशिक्षण कार्यशाला संचालित हो रही हैं। शीतल का सपना नौनिहालों को साहसिक खेलों के प्रति जागरूक करना है।
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उन्होंने पर्वतारोहण को खेल का हिस्सा नहीं बनाए जाने और इसकी नीति नहीं बनाने को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पर्वतारोहण को प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है।
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शीतल पिथौरागढ़ के सल्मोड़ा गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता चालक और माता गृहणी है। शीतल के दो छोटे भाई हैं। स्कूली शिक्षा के दौरान एनसीसी का हिस्सा बनना शीतल के जीवन को दिशा दे गया। दार्जिलिंग व जम्मू कश्मीर में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लेने के बाद शीतल ने वर्ष 2018 में कंचनजंघा पर्वत पर तिरंगा फहरा विश्व की सबसे युवा पर्वतारोही बनकर गिनीज बुक आफ वर्ड रिकार्ड में स्थान बनाया। इसके बाद विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह करने वाली व सबसे कम उम्र की उत्तराखंड की पहली युवा बनी। उन्होंने इसकी शुरुआत उत्तरकाशी के रुद्र गैरा ट्रैक पर ट्रेकिंग से की। शीतल ने सतोपंथ, त्रिशूल सहित अन्य कई पर्वत चोटियों पर तिरंगा फहराया है। प्रदेश सरकार ने इन्हें कभी सम्मानित नहीं किया। जबकि पर्वतारोहण के लिए शीतल के पास शूज खरीदने तक के पैसे नहीं थे। इसकी प्रतिभाग को पहचान ओएनजीसी, सिडकुल की कुछ कंपनियों व लोगों के सहयोग ने आगे बढ़ाया है। शीतल के कोच व पर्वतारोही योगेश गर्ब्याल ने बताया कि शीतल का परिवार बहुत गरीब है। शीतल ने बताया कि लड़की होने के नाते पर्वतारोहण में जाने की इजाजत मिलना आसान नहीं रहा।
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350 नौनिहालों को दे रही हैं प्रशिक्षण
पौड़ी। पर्वतारोही शीतल क्षेत्र में 350 ग्रामीण नौनिहालों को पर्वतारोहण व आपदा से जुड़ा प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। केएमवीएन के सहयोग से यह प्रशिक्षण कार्यशाला संचालित हो रही हैं। शीतल का सपना नौनिहालों को साहसिक खेलों के प्रति जागरूक करना है।
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उन्होंने पर्वतारोहण को खेल का हिस्सा नहीं बनाए जाने और इसकी नीति नहीं बनाने को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पर्वतारोहण को प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है।