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Pauri News: पीआईसीयू में चला इलाज, स्वस्थ होकर घर लौटी नौ माह की नन्ही कीर्ति
Tue, 13 Oct 2026 11:31 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Tue, 13 Oct 2026 11:31 PM IST
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श्रीनगर । फ्लू एन्सेफैलोपैथी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित रुद्रप्रयाग जिले की नौ माह की कीर्ति को बेस अस्पताल के डाक्टरों ने नया जीवन दिया है। पीआईसीयू में 14 दिनों तक चले इलाज के बाद मंगलवार को उसे अस्पताल से छुट्टी मिली।
रुद्रप्रयाग जिले के फाटा निवासी नितिन चंद्र जमलोकी और मेघा की नौ माह की बेटी कीर्ति की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे जिले के विभिन्न अस्पतालों में दिखाया। यहां बच्ची की हालत में अपेक्षाकृत सुधार नहीं आया तो वह उसे बेस अस्पताल श्रीकोट श्रीनगर लाए। यहां बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सीएम शर्मा की निगरानी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गिरी, सीनियर रेजिडेंट डॉ. अजय गोस्वामी तथा जूनियर रेजिडेंट डॉ. ज्योति, डॉ. दीपांशु, डॉ. जाहिद और डॉ. आशीष की टीम ने बच्ची का उपचार किया।
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गिरी ने बताया कि बच्ची फ्लू एन्सेफैलोपैथी से ग्रसित थी। यह फ्लू से जुड़ी एक दुर्लभ और गंभीर जटिलता है, जिसमें मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। बच्ची के मस्तिष्क में सूजन आने के कारण उसकी स्थिति गंभीर हो गई थी और वह बेहोशी की अवस्था में थी। ऐसी स्थिति जानलेवा भी हो सकती है, इसलिए समय पर विशेषज्ञ उपचार बेहद जरूरी था। करीब 14 दिनों के उपचार के बाद वह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौटी। कीर्ति की मां मेघा और पिता नितिन चंद्र जमलोकी ने बताया कि बेटी सफल इलाज पर बेस अस्पताल बाल रोग विभाग के चिकित्सकों का आभार व्यक्त किया।
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रुद्रप्रयाग जिले के फाटा निवासी नितिन चंद्र जमलोकी और मेघा की नौ माह की बेटी कीर्ति की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे जिले के विभिन्न अस्पतालों में दिखाया। यहां बच्ची की हालत में अपेक्षाकृत सुधार नहीं आया तो वह उसे बेस अस्पताल श्रीकोट श्रीनगर लाए। यहां बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सीएम शर्मा की निगरानी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गिरी, सीनियर रेजिडेंट डॉ. अजय गोस्वामी तथा जूनियर रेजिडेंट डॉ. ज्योति, डॉ. दीपांशु, डॉ. जाहिद और डॉ. आशीष की टीम ने बच्ची का उपचार किया।
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एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गिरी ने बताया कि बच्ची फ्लू एन्सेफैलोपैथी से ग्रसित थी। यह फ्लू से जुड़ी एक दुर्लभ और गंभीर जटिलता है, जिसमें मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। बच्ची के मस्तिष्क में सूजन आने के कारण उसकी स्थिति गंभीर हो गई थी और वह बेहोशी की अवस्था में थी। ऐसी स्थिति जानलेवा भी हो सकती है, इसलिए समय पर विशेषज्ञ उपचार बेहद जरूरी था। करीब 14 दिनों के उपचार के बाद वह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौटी। कीर्ति की मां मेघा और पिता नितिन चंद्र जमलोकी ने बताया कि बेटी सफल इलाज पर बेस अस्पताल बाल रोग विभाग के चिकित्सकों का आभार व्यक्त किया।
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