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वीरेंद्र के प्रयास से माध्यमिक विद्यालयों में हुई गणित लैब की स्थापना
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गणित को रुचिकर बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले सहायक अध्यापक वीरेंद्र खंकरियाल को शैलेश मटियानी पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। खंकरियाल जिले के जीआईसी खोलाचौंरी में सहायक अध्यापक गणित के पद पर सेवारत हैं। शिक्षा के क्षेत्र में 18 वर्षों से उल्लेखनीय योगदान रहा है। नौ वर्षों से इनके स्कूल का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा है।
पाबौ ब्लाक स्थित बुरांसी गांव निवासी बीरेंद्र खंकरियाल की जुलाई 2002 को सहायक अध्यापक गणित पद पर पहली तैनाती जीआईसी कैलाश बांगर रुद्रप्रयाग में मिली। वर्ष 2004 में गणित लैब स्थापना को लेकर एससीआरटी नरेंद्रनगर और एनसीआरटी अजमेर राजस्थान में कार्ययोजना प्रस्तुत की, जिसके बाद प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में गणित लैब की स्थापना पर कार्य शुरू हुआ। इसके बाद नवंबर 2005 में उनका स्थानांतरण पौड़ी के जीआईसी खोलाचौंरी में हुआ। उनके प्रयास से धीरे-धीरे छात्र-छात्राओं ने गणित विषय को व्यवहारिक रूप में लेना शुरू कर दिया। उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से बच्चों को गीतों में गणित परिकल्पना को साकार रूप दिया। ड्रेस कोड अपनाने वालों में भी वह जिले के पहले शिक्षक रहे हैं। उनकी कविता संग्रह बचपन को खिलने दो, गुंजन प्रकाशित हो चुकी हैं।
पापा मैं जीना चाहती हूं! गीत ने दी नई पहचान
पौड़ी। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की थीम पर खंकरियाल ने पापा मैं जीना चाहती हूं! गीत की रचना की, जिसे युवा गायिका साक्षी डोभाल ने स्वर दिया। इस गीत ने खंकरियाल को नई पहचान दी। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गायिका को अभियान की ब्रांड अंबेडर बनाया और शिक्षक को सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इस गीत की जमकर सराहना कर चुके हैं।
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पाबौ ब्लाक स्थित बुरांसी गांव निवासी बीरेंद्र खंकरियाल की जुलाई 2002 को सहायक अध्यापक गणित पद पर पहली तैनाती जीआईसी कैलाश बांगर रुद्रप्रयाग में मिली। वर्ष 2004 में गणित लैब स्थापना को लेकर एससीआरटी नरेंद्रनगर और एनसीआरटी अजमेर राजस्थान में कार्ययोजना प्रस्तुत की, जिसके बाद प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में गणित लैब की स्थापना पर कार्य शुरू हुआ। इसके बाद नवंबर 2005 में उनका स्थानांतरण पौड़ी के जीआईसी खोलाचौंरी में हुआ। उनके प्रयास से धीरे-धीरे छात्र-छात्राओं ने गणित विषय को व्यवहारिक रूप में लेना शुरू कर दिया। उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से बच्चों को गीतों में गणित परिकल्पना को साकार रूप दिया। ड्रेस कोड अपनाने वालों में भी वह जिले के पहले शिक्षक रहे हैं। उनकी कविता संग्रह बचपन को खिलने दो, गुंजन प्रकाशित हो चुकी हैं।
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पापा मैं जीना चाहती हूं! गीत ने दी नई पहचान
पौड़ी। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की थीम पर खंकरियाल ने पापा मैं जीना चाहती हूं! गीत की रचना की, जिसे युवा गायिका साक्षी डोभाल ने स्वर दिया। इस गीत ने खंकरियाल को नई पहचान दी। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गायिका को अभियान की ब्रांड अंबेडर बनाया और शिक्षक को सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इस गीत की जमकर सराहना कर चुके हैं।
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