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पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रमाणित करना जरूरी: प्रो. श्रीप्रकाश

Tue, 06 Oct 2026 07:21 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 07:21 PM IST
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Validating traditional knowledge from a scientific perspective is essential: Prof. Shriprakash
श्रीनगर।
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गांव-देहात में पीढ़ियों से चले आ रहे औषधीय पादपों के पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना और प्रमाणित करना जरूरी है। इससे औषधीय पौधों के संरक्षण, संवर्धन और उपयोग को नई दिशा मिलने के साथ ही शोध के सार्थक परिणाम सामने आ सकेंगे। यह बात हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने मंगलवार को उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर कही।
कुलपति ने कहा कि पौराणिक काल से ही औषधीय पादप पारंपरिक चिकित्सा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। प्रकृति में कई ऐसे पौधे मौजूद हैं, जो स्वाद में कड़वे होने के बावजूद मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी और लाभकारी हैं। कुलपति ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर जोर देते हुए छात्रों से औषधीय पादपों पर विशिष्ट शोध करने का आह्वान किया।
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संगोष्ठी में देशभर से पहुंचे विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने 75 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए। इस दौरान कुलपति ने हैप्रेक का निरीक्षण कर शोध कार्यों की जानकारी भी ली। कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. वाईपी रैवानी, डीन प्रो. एमएस पंवार, प्रो. आरएस नेगी, प्रो. ओपी गुसाईं, हैप्रेक निदेशक प्रो. विजयकांत पुरोहित, डॉ. जयदेव चौहान व पीआरओ आशुतोष बहुगुणा सहित कई लोग मौजूद रहे।
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