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थलसेना में सेवा देंगे मेडिकल कॉलेज के दो पूर्व छात्र
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राजकीय मेडिकल कॉलेज से पासआउट दो डॉक्टरों का चयन भारतीय थल सेना की चिकित्सा कोर में हुआ है। दोनों ही छात्र मेडिकल कॉलेज में एक ही कमरे में रहते थे। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने दोनों को स्मृति चिन्ह देते हुए शुभकामनाएं दी।
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के पूर्व छात्र डॉ. नितिन उनियाल और डॉ. पीयूष पांडेय अब चिकित्सक के रूप में भारतीय थल सेना में सेवाएं देंगे। दोनों वर्ष 2015 बैच के छात्र हैं। वर्ष 2020 में एमबीबीएस व एक साल इंटर्नशिप करने के बाद बीते मार्च माह में उनकी एक साल की जेआरशिप पूर्ण हुई थी।
उन्होंने इसी वर्ष जनवरी माह में एएमसी (आर्मी मेडिकल कोर) की परीक्षा दी थी। 26 अप्रैल को जारी रिजल्ट में दोनों का चयन हो गया। डॉ. नितिन मूल रूप से पौड़ी के भदालीखाल (कोटद्वार) के रहने वाले हैं। उनके पिता स्व. गणेश प्रसाद भी सेना में थे। वर्तमान में डॉ. नितिन रुड़की रह रहे हैं। वहीं डॉ. पीयूष दन्यां (कुमाऊं) के रहने वाले हैं। उनके पिता हरीश चंद्र पांडेय शिक्षक हैं।
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डॉ. नितिन ने बताया कि वे और पीयूष एमबीबीएस तृतीय वर्ष से एक साथ रह रहे हैं। परीक्षा में उनका रोल नंबर आगे-पीछे था। जेआरशिप तक भी वह एक ही कमरे मेें रहे। यह खुशी का क्षण है कि सेना में भी उनका चयन एक साथ हुआ है। दोनों ने शनिवार को उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में सेवा का बांड तुड़वाते हुए 38 लाख 54 हजार रुपये जमा करा दिए। इसके बाद उन्हें अनुबंधमुक्त करते हुए शैक्षणिक दस्तावेज सौंप दिए गए।
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श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के पूर्व छात्र डॉ. नितिन उनियाल और डॉ. पीयूष पांडेय अब चिकित्सक के रूप में भारतीय थल सेना में सेवाएं देंगे। दोनों वर्ष 2015 बैच के छात्र हैं। वर्ष 2020 में एमबीबीएस व एक साल इंटर्नशिप करने के बाद बीते मार्च माह में उनकी एक साल की जेआरशिप पूर्ण हुई थी।
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उन्होंने इसी वर्ष जनवरी माह में एएमसी (आर्मी मेडिकल कोर) की परीक्षा दी थी। 26 अप्रैल को जारी रिजल्ट में दोनों का चयन हो गया। डॉ. नितिन मूल रूप से पौड़ी के भदालीखाल (कोटद्वार) के रहने वाले हैं। उनके पिता स्व. गणेश प्रसाद भी सेना में थे। वर्तमान में डॉ. नितिन रुड़की रह रहे हैं। वहीं डॉ. पीयूष दन्यां (कुमाऊं) के रहने वाले हैं। उनके पिता हरीश चंद्र पांडेय शिक्षक हैं।
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डॉ. नितिन ने बताया कि वे और पीयूष एमबीबीएस तृतीय वर्ष से एक साथ रह रहे हैं। परीक्षा में उनका रोल नंबर आगे-पीछे था। जेआरशिप तक भी वह एक ही कमरे मेें रहे। यह खुशी का क्षण है कि सेना में भी उनका चयन एक साथ हुआ है। दोनों ने शनिवार को उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में सेवा का बांड तुड़वाते हुए 38 लाख 54 हजार रुपये जमा करा दिए। इसके बाद उन्हें अनुबंधमुक्त करते हुए शैक्षणिक दस्तावेज सौंप दिए गए।