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प्रसव पीड़ा से कराहती रही महिला नहीं पहुंची 108
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लॉकडाउन के दौरान वाहन न चलने से शुक्रवार को एक गर्भवती महिला की जान पर बन आई। आपातकालीन सेवा 108 के भी हाथ खड़े कर देने से परिजन चार घंटे तक परेशान रहे। कई वाहन चालक अनुमति पत्र न होने के कारण चलने को तैयार नहीं हुए। इधर प्रसव पीड़ा से कराहती महिला की तबियत बिगड़ती जा रही थी। आखिर में कई घंटों की मशक्कत के बाद एक वाहन चालक महिला को अस्पताल ले जाने के लिए राजी हुआ, जहां महिला ने एक बेटी को जन्म दिया।
लॉकडाउन के दौरान यातायात व्यवस्था ठप होने से लोग परेशान है। वाहन चालक बिना अनुमति पत्र के कहीं जाने को तैयार नहीं है। ऐसे में शुक्रवार सुबह कीर्तिनगर के ग्राम पंचायत बंदासा की सुषमा देवी की जान पर बन आई। सामाजिक कार्यकर्ता हनुमंत भंडारी ने बताया कि महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, लेकिन अस्पताल पहुंचाने के लिए कोई साधन नहीं मिला। गर्भवती के पति सोबन सिंह ने पहले 108 सेवा पर कॉल किया। जहां से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद परिजन वाहन के लिए करीब दो किमी दूर तक पहुंचे। चार घंटे बाद एक वाहन चालक बुकिंग पर महिला को अस्पताल ले जाने के लिए माना। राजकीय संयुक्त चिकित्सालय श्रीनगर में महिला ने एक बेटी को जन्म दिया। महिला के पति सोबन सिंह व अन्य परिजनों और आशा कार्यकर्ता ने सरकार से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए सेवा शुरू करने की मांग की है। संवाद
टालती रही 108:
महिला के पति ने 108 से मदद मांगी तो जवाब मिला कि श्रीनगर और कीर्तिनगर में गाड़ियां नहीं चल रही हैं। बताया कि श्रीनगर की 108 में टेक्निकल फॉल्ट है। जबकि कीर्तिनगर वाले में स्टॉफ नहीं है और देवप्रयाग वाली 108 व्यस्त है।
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लॉकडाउन के दौरान यातायात व्यवस्था ठप होने से लोग परेशान है। वाहन चालक बिना अनुमति पत्र के कहीं जाने को तैयार नहीं है। ऐसे में शुक्रवार सुबह कीर्तिनगर के ग्राम पंचायत बंदासा की सुषमा देवी की जान पर बन आई। सामाजिक कार्यकर्ता हनुमंत भंडारी ने बताया कि महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, लेकिन अस्पताल पहुंचाने के लिए कोई साधन नहीं मिला। गर्भवती के पति सोबन सिंह ने पहले 108 सेवा पर कॉल किया। जहां से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद परिजन वाहन के लिए करीब दो किमी दूर तक पहुंचे। चार घंटे बाद एक वाहन चालक बुकिंग पर महिला को अस्पताल ले जाने के लिए माना। राजकीय संयुक्त चिकित्सालय श्रीनगर में महिला ने एक बेटी को जन्म दिया। महिला के पति सोबन सिंह व अन्य परिजनों और आशा कार्यकर्ता ने सरकार से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए सेवा शुरू करने की मांग की है। संवाद
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टालती रही 108:
महिला के पति ने 108 से मदद मांगी तो जवाब मिला कि श्रीनगर और कीर्तिनगर में गाड़ियां नहीं चल रही हैं। बताया कि श्रीनगर की 108 में टेक्निकल फॉल्ट है। जबकि कीर्तिनगर वाले में स्टॉफ नहीं है और देवप्रयाग वाली 108 व्यस्त है।
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