{"_id":"5e4d655c8ebc3ecce268fae2","slug":"the-exodus-commission-did-not-get-expert-members-even-after-two-and-a-half-years-pauri-news-drn3366995184","type":"story","status":"publish","title_hn":"पलायन आयोग को ढाई साल बाद भी नहीं मिले विशेषज्ञ सदस्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पलायन आयोग को ढाई साल बाद भी नहीं मिले विशेषज्ञ सदस्य
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग को गठन के ढाई साल बाद भी विशेषज्ञ सदस्यों का इंतजार है। आयोग को पांच विशेषज्ञ सदस्य मिलने थे, लेकिन इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो सका है, जिससे आयोग का कामकाज प्रभावित हो रहा है। अक्तूबर-नवंबर 2019 से यंग प्रोफेशनल के दो पद भी रिक्त चल रहे हैं, जबकि डाटा एंट्री ऑपरेटर मातृत्व अवकाश पर चल रहीं हैं। नियुक्ति को लेकर आयोग के प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित ही हैं।
उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग का गठन 25 सितंबर 2017 को हुआ। गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी को आयोग का मुख्यालय बनाया गया, जहां 6 अप्रैल 2018 को अपर कृषि निदेशालय भवन पौड़ी में आयोग के कार्यालय का विधिवत शुभारंभ हुआ। आयोग ने विगत वर्षों ग्रामीण स्तर पर सर्वेक्षण, ब्लाक स्तर पर पलायन पर मंथन किए जाने के साथ अनेक कार्य किए। आयोग अभी तक जनपद पौड़ी, अल्मोड़ा व पिथौरागढ़ में पलायन थामने को लेकर सिफारिशें सरकार को सौंप चुका है, जबकि टिहरी, रुद्रप्रयाग व चमोली जनपद में पलायन, उसकी स्थिति, ग्रामीण स्तर पर आजीविका विकास के पहलुओं पर काम कर रहा है। आयोग के गठन को करीब ढाई साल की अवधि बीतने के बाद भी अभी तक आयोग को पांच विशेषज्ञ सदस्य नहीं मिल पाए हैं। आयोग को पर्यटन, कृषि एवं उद्यान, ग्रामीण विकास, लघु उद्योग व जल विशेषज्ञ सदस्य मिलने थे। पलायन आयोग उपाध्यक्ष डा. शरद सिंह नेगी ने बताया कि विशेषज्ञ सदस्यों की नियुक्ति को लेकर सरकार को लिखित व मौखिक प्रस्ताव दिए गए हैं, लेकिन अभी तक आयोग को विशेषज्ञ सदस्य नहीं मिल पाए हैं। विगत 23 जनवरी को आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री के सामने भी विशेषज्ञ सदस्य आयोग को जल्द दिए जाने की मांग की गई है। डा. नेगी ने कहा कि यंग प्रोफेशनल के दो रिक्त पदों पर नियुक्ति का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया है।
विज्ञापन
उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग का गठन 25 सितंबर 2017 को हुआ। गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी को आयोग का मुख्यालय बनाया गया, जहां 6 अप्रैल 2018 को अपर कृषि निदेशालय भवन पौड़ी में आयोग के कार्यालय का विधिवत शुभारंभ हुआ। आयोग ने विगत वर्षों ग्रामीण स्तर पर सर्वेक्षण, ब्लाक स्तर पर पलायन पर मंथन किए जाने के साथ अनेक कार्य किए। आयोग अभी तक जनपद पौड़ी, अल्मोड़ा व पिथौरागढ़ में पलायन थामने को लेकर सिफारिशें सरकार को सौंप चुका है, जबकि टिहरी, रुद्रप्रयाग व चमोली जनपद में पलायन, उसकी स्थिति, ग्रामीण स्तर पर आजीविका विकास के पहलुओं पर काम कर रहा है। आयोग के गठन को करीब ढाई साल की अवधि बीतने के बाद भी अभी तक आयोग को पांच विशेषज्ञ सदस्य नहीं मिल पाए हैं। आयोग को पर्यटन, कृषि एवं उद्यान, ग्रामीण विकास, लघु उद्योग व जल विशेषज्ञ सदस्य मिलने थे। पलायन आयोग उपाध्यक्ष डा. शरद सिंह नेगी ने बताया कि विशेषज्ञ सदस्यों की नियुक्ति को लेकर सरकार को लिखित व मौखिक प्रस्ताव दिए गए हैं, लेकिन अभी तक आयोग को विशेषज्ञ सदस्य नहीं मिल पाए हैं। विगत 23 जनवरी को आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री के सामने भी विशेषज्ञ सदस्य आयोग को जल्द दिए जाने की मांग की गई है। डा. नेगी ने कहा कि यंग प्रोफेशनल के दो रिक्त पदों पर नियुक्ति का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया है।
विज्ञापन