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राष्ट्र निर्माण पर निकल रहे छात्र देंगे दिशा : प्रधान
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केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गढ़वाल विवि से उपाधि लेने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्र निर्माण यात्रा पर निकल रहे हैं। यहां के छात्र आत्मनिर्भर देश को दिशा देंगे।
गढ़वाल विवि के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि वर्चुअल मोड में संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि गढ़वाल विवि राष्ट्र के निर्माण में योगदान देता रहेगा। विवि हिमालयी राज्यों के पर्यावरण अनुकूल पर्यटन, विकास और जल संरक्षण के काम आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी नई शिक्षा नीति (एनईपी) करोड़ों युवाओं की आकांक्षाओं और आशाओं को सार्थक करने का साधन बनेगी। यह नीति विश्व स्तर की शिक्षा प्रणाली में सबसे अधिक परामर्श प्रक्रियाओं के बाद लाई गई है। यह नीति देश की अर्थव्यवस्था को विश्व स्तर तक पहुंचाने के संकल्प को दर्शाती है।
प्रधान ने कहा कि एनईपी की पहली वर्षगांठ में प्रधानमंत्री ने कहा था कि 21वीं सदी का युवा अपनी दुनिया व व्यवस्थाएं अपने हिसाब से बनाना चाहता है इसलिए उसे एक्सपोजर चाहिए। नई शिक्षा नीति युवाओं को विश्वास दिलाती है कि यह पूरी तरह से उनके हौसलों के साथ है। भविष्य में हम कितना आगे जाएंगे और कितनी ऊंचाई पर जाएंगे, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हम वर्तमान में युवाओं को कैसी शिक्षा व दिशा दे रहे हैं।
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गढ़वाल विवि के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि वर्चुअल मोड में संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि गढ़वाल विवि राष्ट्र के निर्माण में योगदान देता रहेगा। विवि हिमालयी राज्यों के पर्यावरण अनुकूल पर्यटन, विकास और जल संरक्षण के काम आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी नई शिक्षा नीति (एनईपी) करोड़ों युवाओं की आकांक्षाओं और आशाओं को सार्थक करने का साधन बनेगी। यह नीति विश्व स्तर की शिक्षा प्रणाली में सबसे अधिक परामर्श प्रक्रियाओं के बाद लाई गई है। यह नीति देश की अर्थव्यवस्था को विश्व स्तर तक पहुंचाने के संकल्प को दर्शाती है।
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प्रधान ने कहा कि एनईपी की पहली वर्षगांठ में प्रधानमंत्री ने कहा था कि 21वीं सदी का युवा अपनी दुनिया व व्यवस्थाएं अपने हिसाब से बनाना चाहता है इसलिए उसे एक्सपोजर चाहिए। नई शिक्षा नीति युवाओं को विश्वास दिलाती है कि यह पूरी तरह से उनके हौसलों के साथ है। भविष्य में हम कितना आगे जाएंगे और कितनी ऊंचाई पर जाएंगे, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हम वर्तमान में युवाओं को कैसी शिक्षा व दिशा दे रहे हैं।
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