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क्षेत्र के विद्यार्थियों को अब स्नातक की पढ़ाई के लिए नहीं काटने पड़ेगे महाविद्यालयों के चक्कर
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गढ़वाल विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद क्षेत्र के विद्यार्थियों को स्नातक की कक्षाओं में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है जिससे वे अन्य महाविद्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी खासे परेशान हैं। समस्या के समाधान के लिए उच्च शिक्षामंत्री डा. धन सिंह रावत ने जीआईसी की भूमि पर महाविद्यालय स्थापित किए जाने की घोषणा की है।
मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि गढ़वाल विश्वविद्यालय केंद्रीय विश्वविद्यालय बन जाने के बाद यहां के छात्रों को विवि में आसनी से प्रवेश नहीं मिल पा रहे है जबकि नगर की जनसंख्या भी काफी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अब राजकीय इंटर कॉलेज श्रीनगर की 30 नाली भूमि पर शीघ्र ही महाविद्यालय का निर्माण किया जाएगा जिसमें खेल मैदान सहित कई सुविधाएं उपलब्ध होंगी। महाविद्यालय के निर्माण से छात्रों के साथ ही स्थानीय व्यापारियों को भी लाभ पहुंचेगा। मंत्री की इस घोषणा पर व्यापार सभा, समाजसेवी संगठन, भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय लोगों ने खुशी व्यक्त की है।
गढ़वाल विश्वविद्यालय के बिड़ला परिसर में पहले छात्रों को आसानी से प्रवेश मिल जाता था लेकिन केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद यहां काफी संख्या में देश और विदेश से छात्र पहुंचते हैं। इससे सीमित सीटें और राष्ट्रीय स्तर पर मेरिट के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया ने छात्रों के समक्ष समस्या खड़ी कर दी है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों के छात्रों को केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रवेश पाना मुश्किल हो चुका है। संवाद
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मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि गढ़वाल विश्वविद्यालय केंद्रीय विश्वविद्यालय बन जाने के बाद यहां के छात्रों को विवि में आसनी से प्रवेश नहीं मिल पा रहे है जबकि नगर की जनसंख्या भी काफी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अब राजकीय इंटर कॉलेज श्रीनगर की 30 नाली भूमि पर शीघ्र ही महाविद्यालय का निर्माण किया जाएगा जिसमें खेल मैदान सहित कई सुविधाएं उपलब्ध होंगी। महाविद्यालय के निर्माण से छात्रों के साथ ही स्थानीय व्यापारियों को भी लाभ पहुंचेगा। मंत्री की इस घोषणा पर व्यापार सभा, समाजसेवी संगठन, भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय लोगों ने खुशी व्यक्त की है।
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गढ़वाल विश्वविद्यालय के बिड़ला परिसर में पहले छात्रों को आसानी से प्रवेश मिल जाता था लेकिन केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद यहां काफी संख्या में देश और विदेश से छात्र पहुंचते हैं। इससे सीमित सीटें और राष्ट्रीय स्तर पर मेरिट के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया ने छात्रों के समक्ष समस्या खड़ी कर दी है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों के छात्रों को केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रवेश पाना मुश्किल हो चुका है। संवाद
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