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प्रयोगशाला में भी पैदा की जा सकती है सौर ऊर्जा
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गढ़वाल विवि के भौतिकी विभाग की ओर से पदार्थ विज्ञान एवं अनुप्रयोग विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वैकल्पिक ऊर्जा और लेजर तकनीक के उपयोगों पर चर्चा की गई।
लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र चौरास में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हो गया है। मुख्य अतिथि आरआरसीएटी इंदौर के वैज्ञानिक डा. केएस बर्त्वाल ने कहा कि समाज के उत्थान के लिए विज्ञान एवं तकनीक का उपयोग बहुत जरूरी है। आईआईटी रुड़की के प्रो. राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि वह यूरोपियन देशों के साथ मिलकर वैकल्पिक ऊर्जा पर काम कर रहे हैं, जिस तरह से सूर्य के प्रकाश से सौर ऊर्जा प्राप्त होती है उसी तरह से प्रयोगशाला में फ्यूजन से सौर ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं। एसआरटी परिसर टिहरी के भौतिक विज्ञानी प्रो. आरसी रमोला ने कुछ विशेष गैसों और कणों से प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। इससे जन-धन की हानि रोकी जा सकती है। राजकीय महाविद्यालय हल्द्वानी के डा. नवल किशोर लोहानी ने सूर्य की सतह पर घटने वाले घटनाओं का असर पृथ्वी पर भी पड़ता है। इन सबके बावजूद पृथ्वी ने अपने को नियंत्रित किया है। जीबी पंत इंजीनियरिंग कॉलेज पौड़ी के डा. किरीट सेमवाल ने बताया कि लेजर टेक्नोलॉजी से मानव की आंखों पर प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। बिड़ला परिसर की डा. शुभ्रा काला, डा. गंभीर कठैत व डा. सुरेंद्र सिह ने पदार्थ विज्ञान की महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजक प्रो. एससी भट्ट, डा. मनीष उनियाल, विशिष्ट अतिथि डीएसडब्लू प्रो. पीएस राणा, वित्त अधिकारी प्रो. एनएस पंवार व डीन स्कूल ऑफ साइंसेज प्रो. डीएस नेगी आदि मौजूद थे।
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लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र चौरास में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हो गया है। मुख्य अतिथि आरआरसीएटी इंदौर के वैज्ञानिक डा. केएस बर्त्वाल ने कहा कि समाज के उत्थान के लिए विज्ञान एवं तकनीक का उपयोग बहुत जरूरी है। आईआईटी रुड़की के प्रो. राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि वह यूरोपियन देशों के साथ मिलकर वैकल्पिक ऊर्जा पर काम कर रहे हैं, जिस तरह से सूर्य के प्रकाश से सौर ऊर्जा प्राप्त होती है उसी तरह से प्रयोगशाला में फ्यूजन से सौर ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं। एसआरटी परिसर टिहरी के भौतिक विज्ञानी प्रो. आरसी रमोला ने कुछ विशेष गैसों और कणों से प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। इससे जन-धन की हानि रोकी जा सकती है। राजकीय महाविद्यालय हल्द्वानी के डा. नवल किशोर लोहानी ने सूर्य की सतह पर घटने वाले घटनाओं का असर पृथ्वी पर भी पड़ता है। इन सबके बावजूद पृथ्वी ने अपने को नियंत्रित किया है। जीबी पंत इंजीनियरिंग कॉलेज पौड़ी के डा. किरीट सेमवाल ने बताया कि लेजर टेक्नोलॉजी से मानव की आंखों पर प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। बिड़ला परिसर की डा. शुभ्रा काला, डा. गंभीर कठैत व डा. सुरेंद्र सिह ने पदार्थ विज्ञान की महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजक प्रो. एससी भट्ट, डा. मनीष उनियाल, विशिष्ट अतिथि डीएसडब्लू प्रो. पीएस राणा, वित्त अधिकारी प्रो. एनएस पंवार व डीन स्कूल ऑफ साइंसेज प्रो. डीएस नेगी आदि मौजूद थे।
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